
Himachal Political Crisis: हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नौ विधायकों को शिकायत के आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक गतिरोध जारी है और निकट भविष्य में इसके सुलझने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। नाहन के कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी ने सदन के कामकाज पर नियम 79 के तहत स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है कि हाल के बजट सत्र के दौरान सदन के अंदर और अध्यक्ष के चेंबर में कथित तौर पर हिंसा और अनुशासनहीनता में शामिल होने के लिए भाजपा के नौ विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिव ने कहा कि शिकायत के आधार पर नौ भाजपा विधायकों - ऊना से सतपाल सत्ती, नाचन से विनोद कुमार, चुराह से हंसराज, बंजार से सुरेंद्र शौरी, सुलह से विपिन परमार, त्रिलोक जम्वाल, बिलासपुर, बल्ह से इंद्र सिंह गांधी, आनी से लोकेंद्र कुमार और करसोग से दीपराज को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। नौ भाजपा विधायकों को 18 मार्च तक लिखित रूप में या अपनी व्यक्तिगत उपस्थिति के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया था।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कहा कि अगर नौ भाजपा विधायकों ने जवाब नहीं दिया तो अध्यक्ष उन्हें निलंबित कर सकते हैं या अयोग्य घोषित कर सकते हैं। सोलंकी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि इन भाजपा विधायकों ने सदन के अंदर और अध्यक्ष के कक्ष में भी हंगामा किया था, विधानसभा कर्मचारियों से महत्वपूर्ण कागजात छीने और उन्हें सदन में फाड़ा दिया। जब आंदोलनकारी विधायकों को सदन से बाहर निकालने का आदेश जारी किया गया तो उन्होंने मार्शलों के साथ धक्का-मुक्की भी की। कांग्रेस विधायक ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की वीडियो क्लिपिंग विधानसभा रिकॉर्ड में भी उपलब्ध है और विधायकों का व्यवहार अक्षम्य है।
उन्होंने कहा कि इन विधायकों के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 194 के तहत सदन की अवमानना के तहत कार्यवाही की जाए। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर पहले ही इसे बदले की राजनीति की कार्रवाई करार दे चुके हैं और कहा है कि अगर जरूरी हुआ तो उनकी पार्टी इस मामले में कानूनी विकल्प तलाशेगी। पार्टी व्हिप की अवहेलना करते हुए वित्तीय विधेयकों को पारित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य के दौरान सदन से अनुपस्थित रहने के कारण छह कांग्रेस विधायकों को अध्यक्ष द्वारा अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
कांग्रेस के इन छह विधायक और तीन निर्दलीय विधायक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन छह कांग्रेस विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया। छह कांग्रेस विधायकों ने अपनी अयोग्यता को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया। विधायकों की याचिका पर शीर्ष अदालत 18 मार्च को सुनवाई करेगा। ये विधायक मजबूत सुरक्षा घेरे में गुड़गांव की एक रीजेंसी में रह रहे हैं।
Published on:
15 Mar 2024 08:43 pm
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