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SIR in Gujarat: पोरबंदर के पूर्व भाजपा अध्यक्ष का नाम भी चुनाव आयोग ने हटाया, हाईकोर्ट ने जुड़वाया

पोरबंदर के भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष विक्रम ओडेद्रा ने 30 मार्च को नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन आवेदन दिया, जिसे आयुक्त ने मंजूर कर लिया। लेकिन 5 अप्रैल को नाम हटाने का नोटिस जारी किया गया।

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भारत

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Mukul Kumar

Apr 12, 2026

चुनाव आयोग। (फोटो-IANS)

नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच चले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR अभियान में गुजरात की वोटर लिस्ट से 68.12 लाख नाम हटा दिए गए। कुल वोटर 5 करोड़ 8 लाख से घटकर 4 करोड़ 40 लाख रह गए। यह 13.4 फीसदी की गिरावट है।

उत्तर प्रदेश के आंकड़े आने से पहले तक गुजरात इस सूची में सबसे आगे था। उत्तर प्रदेश में 13.21 फीसदी नाम कटे। लेकिन गुजरात अभी भी इस चौंकाने वाले दौड़ में सबसे आगे है।

भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष को भी कोर्ट जाना पड़ा

पोरबंदर के विक्रम ओडेद्रा भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष हैं। उन्होंने 30 मार्च को आवेदन दिया। नगर निगम के आयुक्त ने आवेदन मंजूर भी किया। लेकिन 5 अप्रैल को एक नोटिस आया कि विधानसभा क्षेत्र की लिस्ट में नाम नहीं मिला इसलिए नगर निगम की लिस्ट में भी नाम नहीं डाला जा सकता।

हालांकि हाईकोर्ट ने इसे गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि जब आयुक्त ने एक बार आवेदन मान लिया तो बाद में उसे पलटा नहीं जा सकता। कुल मिलाकर कोर्ट की दखलंदाजी के बाद ही विक्रम का नाम वोटर लिस्ट में फिर से जुड़ा।

संजय गाढ़वी- मां बीमार थीं, गांव गया, नाम कट गया

अहमदाबाद के खोखरा इलाके के संजय गाढ़वी 32 साल के हैं। पिछले दो साल कच्छ के मांडवी गांव में बीमार मां की देखभाल में बिताए। जब लौटे तो पता चला नाम लिस्ट से गायब है।

उनके पास मानिनगर विधानसभा का वोटर कार्ड था। 12 मार्च को उन्होंने आवेदन दिया था जिसकी डिजिटल पुष्टि भी हुई थी। हाईकोर्ट के जस्टिस एनएसएस गौड़ा और जेएल ओडेद्रा की बेंच ने यह डिजिटल पुष्टि मानते हुए उनका नाम लिस्ट में डालने का आदेश दिया। शनिवार सुबह कांग्रेस ने उन्हें खोखरा वार्ड से अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया।

जयेश पटेल को मैसेज आया, फिर भी नाम नहीं

जयेश पटेल पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के पूर्व संयोजक हैं और अब भाजपा के साथ हैं। उन्होंने SIR के दौरान अपना पता बदलने की सूचना ब्लॉक लेवल अफसर को दी।

SMS पर पुष्टि भी आई। लेकिन जब भाजपा दफ्तर में चुनाव लड़ने का आवेदन देने गए तो पता चला नाम ही नहीं है। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी नागरिक का चुनाव में भाग लेने का अधिकार नहीं छीना जा सकता।

कविता यादव को नहीं मिली राहत

अहमदाबाद की कविता चेतन यादव की याचिका सफल नहीं रही। उनका नाम विधानसभा क्षेत्र की लिस्ट में नहीं था। कोर्ट ने मामले में दिलचस्पी नहीं दिखाई और उन्होंने खुद याचिका वापस ले ली।

अब नाम जोड़ने का वक्त भी खत्म

यह सिर्फ आठ लोगों की कहानी नहीं है. गुजरात में 68 लाख नाम कटे। इनमें से कितनों के पास कोर्ट जाने का वक्त, पैसा और जानकारी होगी? यह बड़ा सवाल है।

कोर्ट पहुंचने वाले आठ लोगों में सात की जीत हुई। बाकी 67 लाख 99 हजार 992 का क्या? 26 अप्रैल को गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव हैं। नामांकन की आखिरी तारीख शनिवार को निकल गई। जो कोर्ट नहीं गए वो अब सिर्फ देख सकते हैं।