
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ। (Photo: IANS)
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के सामने नई चुनौती है। इस साल SIR के तहत मतदाताओं की सूची जारी हो रही है। अगले साल पहली बार राज्य में इस सूची के मुताबिक विधानसभा चुनाव होंगे। उम्मीद है कि इस बार कुल मतदाताओं की संख्या कम हो सकती है। इससे पार्टियां परेशान हैं। इससे निपटने के लिए भाजपा सक्रिय हो गई है। सपा ने भी कदम उठाए हैं।
चुनाव आयोग मतदाता सूची को ‘शुद्ध’ कर रहा है। विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के जरिए। इसके तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की जा चुकी है। इसमें 125556025 मतदाताओं के नाम हैं। मौजूदा मतदाता सूची में 154430092 नाम हैं। 2.89 करोड़ मतदाता ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हैं।
करीब तीन करोड़ मतदाता ड्राफ्ट लिस्ट से क्यों बाहर हैं? इसका जवाब चुनाव आयोग ने दिया है कि 46.23 लाख तो मर चुके हैं, 2.17 करोड़ वोटर SIR के दौरान बीएलओ को मिले नहीं और 25.47 लाख के नाम एक से ज्यादा जगह पर पाए गए।
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 92301024 मतदाताओं ने वोट डाले थे। उस समय वोटर लिस्ट में दर्ज मतदाताओं की कुल संख्या 151246168 थी। यानि 61.03 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।
2017 में यूपी में कुल 141663646 वोटर थे। इनमें से 86755499 ने वोट डाले थे। यानि, 2017 में भी 2022 के बराबर (61.24 प्रतिशत) ही वोटिंग हुई थी।
ऊपर के आंकड़ों को देखें तो 2017 से 2022 के पांच साल में कुल 9582522 वोटर बढ़े। 2022 से 2025 के बीच 3183924 मतदाता बढ़ गए।
बीते दो चुनाव में वोटिंग प्रतिशत लगभग बराबर ही रहा। 2022 में 2017 की तुलना में जितने वोटर बढ़े, मतदान उतना भी नहीं बढ़ा। वोटर करीब 95 लाख बढ़े, लेकिन वोट केवल 5545525 (नए मतदाताओं का करीब 60 प्रतिशत)। ऐसे में अगर अंतिम मतदाता सूची में करीब 12.55 करोड़ मतदाता ही रहे तो 2027 में पड़ने वाले कुल मतों की संख्या में ज्यादा इजाफा की उम्मीद भी नहीं की जा सकती।
2022 के चुनाव में सबसे ज्यादा 41.29 प्रतिशत (38051721) वोट बीजेपी को ही मिले थे। अगर वोटिंग के लिए निकलने वालों की संख्या अप्रत्याशित रूप से नहीं बढ़ी तो बीजेपी को ही सबसे ज्यादा नुकसान होने का खतरा है।
बीजेपी को ज्यादा खतरा इसलिए भी लग रहा है, क्योंकि वोटर ड्राफ्ट लिस्ट में जिन इलाकों से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे हैं, उनमें से अधिकतर में भाजपा जीती है।
SIR Draft Voter List में अपेक्षाकृत अधिक संख्या में जिन क्षेत्रों के वोटर्स के नाम नहीं हैं, उनमें भाजपा का चुनावी प्रदर्शन समझिए:
| शहर | कुल शहरी सीटें | भाजपा के विधायक |
| लखनऊ | 9 | 7 |
| कानपुर | 10 | 7 |
| वाराणसी | 8 | 7 |
| आगरा | 9 | 9 |
ये सब शहरी क्षेत्र हैं, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी/एनडीए ने अच्छा प्रदर्शन किया था।
| क्षेत्र | बीजेपी (NDA) वोट शेयर | सपा-कांग्रेस (INDIA) वोट शेयर | सीटों का परिणाम (कुल 80) |
| शहरी (Urban) | 41% (बढ़त) | 30% | बीजेपी ने 17 प्रमुख शहरी सीटों में से 12 पर जीत दर्ज की। |
| ग्रामीण (Rural) | 35% (गिरावट) | 44% (भारी बढ़त) | इंडिया गठबंधन ने ग्रामीण बहुल इलाकों में बीजेपी को कड़ी शिकस्त दी। |
2022 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टियों में सपा दूसरे नंबर पर थी। माना जाता है कि सपा के वोट बैंक में मुसलमानों के अच्छी संख्या है। लेकिन, बीते दिनों मुस्लिम बहुल जिलों में भी एनडीए की स्थिति सही हुई है। इसे इस चार्ट से समझा जा सकता है।
| जिला | लोकसभा क्षेत्र (MP) | पार्टी | विधानसभा क्षेत्र (MLA) | पार्टी |
| रामपुर | मोहिबुल्लाह नदवी | सपा | रामपुर सदर: आकाश सक्सेना | BJP |
| स्वार: शफीक अहमद अंसारी | Apna Dal (S) | |||
| चमरौआ: नसीर अहमद खान | सपा | |||
| बिलासपुर: बलदेव सिंह औलख | BJP | |||
| मिलक (SC): राजबाला | BJP | |||
| सहारनपुर | इमरान मसूद | कांग्रेस | सहारनपुर नगर: राजीव गुंबर | BJP |
| सहारनपुर: आशु मलिक | सपा | |||
| देवबंद: बृजेश सिंह रावत | BJP | |||
| गंगोह: कीरत सिंह गुर्जर | BJP | |||
| नकुड़: मुकेश चौधरी | BJP | |||
| बेहट: उमर अली खान | सपा | |||
| रामपुर मनिहारन (SC): देवेंद्र निम | BJP | |||
| मुजफ्फरनगर | हरेंद्र सिंह मलिक | सपा | मुजफ्फरनगर सदर: कपिल देव अग्रवाल | BJP |
| बुढ़ाना: राजपाल बालियान | RLD | |||
| चरथावल: पंकज कुमार मलिक | सपा | |||
| खतौली: मदन भैया | RLD | |||
| पुरकाजी (SC): अनिल कुमार | RLD | |||
| मुरादाबाद | रुचि वीरा | सपा | मुरादाबाद नगर: रितेश गुप्ता | BJP |
| मुरादाबाद ग्रामीण: नासिर कुरैशी | सपा | |||
| कुंदरकी: रामवीर सिंह* (उपचुनाव विजेता) | BJP | |||
| ठाकुरद्वारा: नवाब जान | सपा | |||
| बिलारी: मोहम्मद फहीम इरफान | सपा | |||
| कांठ: कमाल अख्तर | सपा | |||
| बिजनौर | चंदन चौहान | RLD | बिजनौर सदर: शुचि चौधरी | BJP |
| नजीबाबाद: तस्लीम अहमद | सपा | |||
| नगीना (SC): मनोज कुमार पारस | सपा | |||
| धामपुर: अशोक कुमार राणा | BJP | |||
| बढ़ापुर: सुशांत सिंह | BJP | |||
| चांदपुर: स्वामी ओमवेश | सपा | |||
| नहटौर (SC): ओम कुमार | BJP |
इन आंकड़ों के मद्देनजर बीजेपी की परेशानी समझी जा सकती है।
बीजेपी का प्लान ज्यादा से ज्यादा योग्य लोगों को मतदाता सूची में शामिल कराने का है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक बीजेपी ने हर बूथ पर 200 मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल कराने का टार्गेट तय किया है।
सपा ने भी नए बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) बनाए हैं और ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल कराने की मुहिम छेड़ी है।
चुनाव विश्लेषक रहे और SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी अपनी बात रख चुके योगेंद्र यादव लगातार कहते रहे हैं कि एसआईआर करना गलत नहीं है, करने का तरीका गलत है। दुनिया में कहीं भी एक बार में इतनी बड़ी संख्या में वोटर के मतदाता सूची से बाहर होने का उदाहरण नहीं है। बढ़ती जनसंख्या के साथ वोटर कम नहीं हो सकते। चुनाव आयोग को घर-घर जाकर चेक करना चाहिए और जरूरत के हिसाब से वोटर को सूची से हटाना या जोड़ना चाहिए। असम में ऐसा किया भी गया है। वहां मतदाताओं की अंतिम संख्या लगभग बराबर रही।
| राज्य | S.I.R. से पहले | S.I.R. के बाद | हटाये गए नाम (Deletions) | कुल कटौती (%) |
| बिहार | 7.89 करोड़ | 7.42 करोड़ | 0.47 करोड़ | 5.95% |
| उत्तर प्रदेश | 15.44 करोड़ | 12.55 करोड़ | 2.89 करोड़ | 18.7% |
| पश्चिम बंगाल | 7.66 करोड़ | 7.08 करोड़ | 0.58 करोड़ | 7.57% |
| तमिलनाडु | 6.41 करोड़ | 5.43 करोड़ | 0.97 करोड़ | 15.2% |
आप के राज्य सभा सांसद संजय सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग ने कुछ ही समय पहले जो मतदाता सूची जारी की है उसके आंकड़े मौजूद एसआईआर के बाद दिए गए आंकड़े से एकदम मेल नहीं खाते हैं।
Updated on:
08 Jan 2026 04:03 pm
Published on:
08 Jan 2026 03:21 pm
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