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दिल्ली कोर्ट से सोनिया गांधी को राहत, मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के मामले में सुनवाई स्थगित

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट विवाद में FIR दर्ज करने की मांग पर सुनवाई को 18 अप्रैल तक टाल दिया है। मामले में याचिकाकर्ता और बचाव पक्ष की बहस जारी है।

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Sonia Gandhi

Sonia Gandhi(Image-ANI)

नई दिल्ली में एक अहम कानूनी मामले ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से जुड़ी वोटर लिस्ट विवाद की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी थी लेकिन सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की सुनवाई को टाल दिया गया। कोर्ट ने अब इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 18 अप्रैल तय की है।

भारतीय नागरिकता से पहले नाम शामिल होने का विवाद

इस मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता हासिल करने से पहले ही वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया था। याचिका में इस कथित गड़बड़ी की जांच के लिए FIR दर्ज करने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि यह मामला फर्जी दस्तावेजों और गलत घोषणा से जुड़ा हो सकता है, इसलिए इसकी गहन जांच जरूरी है। उन्होंने अदालत के सामने कुछ दस्तावेज भी पेश किए, जिनके आधार पर प्रथम दृष्टया जांच की मांग की गई।

सोनिया गांधी की तरफ से पेश पक्ष की बहस अधूरी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें पूरी कर ली गईं, लेकिन सोनिया गांधी की तरफ से पेश पक्ष की बहस अधूरी रह गई। इसी वजह से अदालत ने सुनवाई को आगे बढ़ाने का फैसला लिया। इससे पहले दिसंबर 2025 में विशेष न्यायाधीश ने इस याचिका पर विचार करने की अनुमति दी थी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया गया था। अदालत ने कहा था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे विस्तार से सुना जाएगा। हालांकि, पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने FIR दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया था, यह कहते हुए कि ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित है।

बीजेपी ने इसे चुनावी गड़बड़ी का उदाहरण बताया

इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इसे चुनावी गड़बड़ी का उदाहरण बताया है, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक प्रेरित बताया है। सोनिया गांधी की ओर से अदालत में कहा गया कि नागरिकता से जुड़े मुद्दे केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि वोटर लिस्ट से जुड़े विवाद चुनाव आयोग के अंतर्गत आते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि अब तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है जो फर्जीवाड़े को साबित कर सके।