हरियाणा स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर ने कफ-सिरप बनाने वाली दवा कंपनी मेडेन फार्मास्युटिकल्स द्वारा मानदंडों का गंभीर उल्लंघन पाया है। अथॉरिटी ने कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया जाए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर चेतावनी जारी किए जाने के बाद भारतीय दवा कंपनी मेडेन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड कंपनी सवालों के घेरे में और जांच की जा रही है। इसी बीच कफ सिरप बनाने वाली दवा कंपनी मेडेन फार्मास्युटिकल्स को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई है। हरियाणा स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर ने मेडेन फार्मास्युटिकल्स के कच्चे माल की क्वालिटी टेस्टिंग मानदंडो पर सवाल उठाया है। इसके साथ ही कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और पूछा है क्यों ना कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया जाए। बता दें कि गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत के बाद फार्मा कंपनी मेडेन फार्मास्युटिकल्स सवालों के घेरे में आ गई है।
हरियाणा राज्य औषधि नियंत्रक अधिकारियों ने मेडेन फार्मा कंपनी में 12 उल्लंघनों को सूचीबद्ध तैयार किया है। राज्य औषधि नियंत्रक ने 7 अक्टूबर को कंपनी को जारी कारण बताओ नोटिस में आरोप लगाया कि कंपनी ने विवादास्पद कफ सिरप के निर्माण में प्रयुक्त कच्चे माल की क्वालिटी टेस्टिंग नहीं की। एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक, पांच पन्नों के नोट में तैयार किया है। जारी नोटिस के अनुसार, मेडेन फार्मा कंपनी को 14 अक्टूबर तक जवाब देना होगा।
नोटिस में कहा गया है कि कंपनी में दवा बनाने के उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल की क्वालिटी टेस्टिंग नहीं की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रोपलीन ग्लाइकोल जिसका उपयोग दवाओं के निर्माण के लिए किया जाता है। उसमें दूषित पदार्थ डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल हो सकते हैं। इन जहरीले रसायनों को डब्ल्यूएचओ की ओर से मौतों के संभावित कारणों के रूप में नामित किया गया है। इसके साथ ही दवा निर्माण के लिए सख्त क्वालिटी कंट्रोल सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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स्टेट एफडीए ने मेडेन फार्मा को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब देने के लिए कहा है। इसके साथ ही कंपनी से पूछा गया कि क्यों ना उसका मैनुफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिया जाए। अगर एक सप्ताह में कंपनी जवाब नहीं देती है तो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और नियम 1945 के अनुसार आपके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।
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