
मेजर नरेंद्र सिंह को शौर्य चक्र मिला था
Army Day 2026: भारतीय सेना की विशिष्ट 9वीं बटालियन, पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) यानी 9 पैरा एसएफ के सूबेदार मेजर नरेंद्र सिंह शौर्य, समर्पण और नेतृत्व का जीवंत उदाहरण हैं। उनका सैन्य करियर अदम्य साहस से भरा रहा है, जिसकी सर्वोच्च पहचान उन्हें मिला शौर्य चक्र है।
हरियाणा के रहने वाले सूबेदार मेजर नरेंद्र सिंह ने भारतीय सेना में भर्ती होकर पैराशूट रेजिमेंट को चुना, जो अपनी एयरबोर्न क्षमता और अत्यंत जोखिम भरे अभियानों के लिए जानी जाती है। समय के साथ वे नायब सूबेदार से सूबेदार और फिर सूबेदार मेजर के पद तक पहुंचे। यह पदोन्नति उनके अनुशासन, रणनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।
बता दें कि 9 पैरा एसएफ आतंकवाद विरोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है, जहां शारीरिक और मानसिक दृढ़ता सर्वोपरि होती है।
अपने लंबे सेवाकाल में सूबेदार मेजर नरेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर कई अहम अभियानों में हिस्सा लिया। उनकी वर्दी पर सजे अनेक पदक उनकी बहादुरी और योगदान की कहानी कहते हैं। शौर्य चक्र के अलावा उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) से भी सम्मानित किया गया है, जो उनकी निष्ठा और उत्कृष्ट सेवा को दर्शाता है।
21 जुलाई 2019 को LoC पर घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को नाकाम करना उनके करियर का सबसे साहसी अध्याय रहा। उस समय नायब सूबेदार रहे नरेंद्र सिंह ने निगरानी दल का नेतृत्व करते हुए भारी हथियारों से लैस आतंकियों की घुसपैठ का पता लगाया। घोर अंधेरी रात में, बारूदी सुरंगों से भरे संकरे रास्ते और घने जंगल के बीच उन्होंने अपने दस्ते को रणनीतिक रूप से तैनात किया।
हवलदार भाल सिंह के साथ बेहद नजदीकी मुठभेड़ में उन्होंने दो आतंकियों को ढेर किया और एक को घायल कर दिया, जिससे भारतीय ठिकानों पर संभावित हमले टल गए। यह ऑपरेशन उनके साहस, रणनीतिक कौशल और दबाव में नेतृत्व क्षमता का प्रतीक बना।
इन्हीं अद्वितीय वीरता के लिए उन्हें 2021 के गणतंत्र दिवस समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्रशस्ति पत्र में उनकी “असाधारण बहादुरी, रणनीतिक सूझबूझ और युद्ध क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व” की सराहना की गई।
Published on:
14 Jan 2026 03:01 pm
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