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‘आशंका होने पर पहले ही होगी गिरफ्तारी, तो नहीं होंगे दंगे’, एंटी-सोशल बिल पर बोले केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार

Sukanta Majumdar on Anti Social Bill: केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने एंटी सोशल बिल का समर्थन करते हुए कहा कि संभावित हिंसा या दंगों को रोकने के लिए पुलिस को एहतियाती कार्रवाई का अधिकार मिलना चाहिए।
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Union Minister Sukanta Majumdar

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार (Photo-IANS)

Anti Social Bill: पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और एंटी-सोशल बिल पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि एंटी-सोशल बिल से पुलिस को जरूरी अतिरिक्त कानूनी अधिकार मिलेंगे। जिससे पुलिस को संभावित दंगों या बिगड़ते हालात का अंदाजा होने पर संदिग्धों को एहतियाती हिरासत में लेने में मदद मिलेगी, जिससे दंगा होने से पहले ही उसे रोका जा सकेगा और आम जनता की जान-माल की सुरक्षा हो सकेगी।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के ड्राफ्ट की समीक्षा करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नौ सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति के गठन पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा राज्य में UCC लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार पहले ही UCC को एक बिल के तौर पर पेश कर चुकी है और जल्द ही इस पर चर्चा होने की उम्मीद है।

आपको बता दें कि असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पश्चिम बंगाल की शुभेन्दु सरकार ने बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026 को पारित करा लिया है। इसके तहत बिना मुकदमे के 12 महीने तक एहतियाती हिरासत में रखने का प्रावधान होगा। यह कानून 13 जुलाई से लागू होगा।

UCC पर बंगाल में 9 सदस्यीय समिति गठित

पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) 2026 के मसौदा विधेयक की समीक्षा और परीक्षण के लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। राज्य सरकार ने इस संबंध में 10 जुलाई को अधिसूचना जारी की थी।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का अर्थ है ऐसा समान नागरिक कानून, जो धर्म, जाति या समुदाय की परवाह किए बिना देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो। इसके तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी के लिए एक समान कानून होंगे। वर्तमान में भारत में इन विषयों पर अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। लेकिन यूसीसी का उद्देश्य इन सभी की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है, ताकि सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान कानूनी व्यवहार मिल सके।

उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य

उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है, जहां समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की गई है। इसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और असम समेत कई अन्य राज्यों ने भी यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसी क्रम में हाल ही में महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने भी यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है।

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