
सुप्रीम कोर्ट। पत्रिका फाइल फोटो
Supreme Court on Banke Bihari temple matters: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मंदिरों में पैसे देकर ‘स्पेशल पूजा’ कराने की परंपरा पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे देवता के विश्राम समय में बाधा पड़ती है और यह उचित नहीं है। देश के चीफ जस्टिस (सीजेआइ) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर से जुड़ी एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में मुख्य रूप से मंदिर के दर्शन समय में बदलाव और देहरी पूजा जैसी आवश्यक धार्मिक परंपराओं को रोके जाने को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान सीजेआइ ने सामान्य टिप्पणी करते हुए कहा कि कि दोपहर 12 बजे मंदिर बंद होने के बाद भी भगवान को एक मिनट तक आराम नहीं मिलता।
उन्होंने टिप्पणी की कि इसी समय सबसे अधिक विशेष पूजाएं कराई जाती हैं, जिनमें केवल वे लोग शामिल होते हैं जो मोटी रकम अदा कर सकते हैं। पीठ ने इसे भगवान के 'शोषण' जैसा करार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाई पावर्ड कमेटी के मेंबर सेक्रेटरी को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई जनवरी के पहले सप्ताह में होगी।
मामला श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर की मैनेजमेंट कमेटी की याचिका से जुड़ा है, जिसे उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट ऑर्डिनेंस, 2025 के तहत गठित किया गया था। याचिका में अगस्त में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई हाई पावर्ड कमिटी के कुछ फैसलों, विशेषकर दर्शन समय और मंदिर की परंपराओं में बदलाव पर आपत्ति जताई गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने दलील दी कि दर्शन के समय मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा और अनुष्ठानों का हिस्सा हैं। हालांकि, उन्होंने पीठ की इस बात से सहमति जताई कि देवता के विश्राम समय में किसी को भी विशेष दर्शन का अधिकार नहीं होना चाहिए।
Published on:
16 Dec 2025 02:59 am
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