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फाइटर पायलट से राजनीति-खेल प्रशासक तक का सफर, कलमाडी कैसे बने ₹70,000 करोड़ के कॉमनवेल्थ घोटाले के आरोपी

Suresh Kalmadi Died: पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश शामराव कलमाडी का आज निधन हो गया। वह 81 साल के थे। कॉमनवेल्थ घोटाले की जांच के चलते उनका पूरा राजनीतिक जीवन खत्म हो गया। जानिए पूरी कहानी...

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पूर्व सांसद सुरेश कलमाडी का निधन। (फोटो- X/@VivekanandUjlmb)

Suresh Kalmadi Died: भारतीय राजनीति और खेल प्रशासन की मशहूर हस्ती रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाडी का लंबी बीमारी के बाद 81 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने साल 2010 में भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन करवाया था। UPA 2 की सरकार ने कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर जमकर प्रचार प्रसार किया। शुरुआत में कलमाडी इसे लेकर खूब चमके भी, लेकिन बाद में यह बड़ा काला दाग बनकर उनकी सियासी कमीज पर लगा। इस वजह से कांग्रेस और कलमाडी आगामी चुनाव में डूब गए।

पाकिस्तान को दो जंगों में चटाई धूल

सुरेश शामराव कलमाडी का जन्म 1 मई 1944 को मद्रास (चेन्नई) में हुआ। पुणे के सेंट विंसेंट हाईस्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फर्ग्यूसन कॉलेज डिग्री ली। फिर वे साल 1960 में नेशनल डिफेंस अकादमी यानी NDA में चले गए। यहां पढ़ाई और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद साल 1964 में वह फाइटर पायलट के रूप में कमीशन हुए। अगले ही साल भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ गई।

कलमाडी ने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान के बीच हुए जंग में सक्रिय रूप से भाग लिया। स्क्वाड्रन पद से सेवानिवृत्त होने से पहले तक उन्होंने आठ मेडल प्राप्त किए। वह 1972-74 तक NDA में इंस्ट्रक्टर भी रहे। 1974 में वायुसेना से समय पूर्व सेवानिवृत्ति लेकर कलमाडी पुणे लौटे। यहां उन्होंने पूना कॉफी हाउस चलाया, जो राजनीतिक गलियारों का केंद्र बन गया। यही पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे व कांग्रेस नेता संजय गांधी की नजर सुरेश कलमाडी पर पड़ी।

संजय लेकर आए कलमाडी को राजनीति में

वे युवा कांग्रेस से जुड़े। धीरे-धीरे पहले महाराष्ट्र कांग्रेस, फिर केंद्रीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत बनाते गए। 1982 में राज्यसभा सांसद बने। फिर 1996, 2004 और 2009 में पुणे से लोकसभा सांसद चुने गए। पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रेल राज्य मंत्री रहे।

पुणे से लोकसभा सांसद रहने के दौरान उन्होंने पुणे फेस्टिवल की शुरुआत (1989), पुणे इंटरनेशनल मैराथन, नेशनल गेम्स (1994) और कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स (2008) जैसे आयोजन करवाए। यहीं से उनकी छवि एक राजनेता से सफल खेल प्रशासक के तौर पर भी बन गई। जब साल 2010 में भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी मिली तो उस समय कांग्रेस सांसद कलमाडी इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) के अध्यक्ष थे।

CWG का लगा आरोप और नेपथ्य में गए कलमाडी

कलमाडी की असली परीक्षा भारत में सफल कॉमनवेल्थ गेम्स कराने के रूप में हुई। वह CWG आयोजन समिति के चेयरमैन बने। यह आयोजन भारत की वैश्विक छवि सुधारने का मौका था। 71 देशों के 4352 एथलीटों ने हिस्सा लिया और भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ मेडल टैली हासिल किया, लेकिन CWG की तैयारी के दौरान भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। अनुमानित ₹70,000 करोड़ का घोटाला सामने आया। इंफ्रास्ट्रक्चर में देरी, घटिया निर्माण और खिलाड़ियों के लिए खराब सुविधाओं की बात सामने आई।

केंद्रीय सतर्कता आयोग ने कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला मामले में जांच की सिफारिश की। CBI ने छापे मारे और साल 2011 में पूर्व केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगे। कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। IOA अध्यक्ष पद से हटाए गए।

15 साल चली कानूनी लड़ाई में कलमाडी ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। अप्रैल 2025 में दिल्ली कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में क्लीन चिट दे दी। कोर्ट ने कहा कि सबूत नहीं मिले। हालांकि राजनीतिक नुकसान अपूरणीय था। इस वजह से वे सक्रिय राजनीति से दूर हो गए।