
सीएम विजय (Photo - ANI)
तमिलनाडु (Tamil Nadu) में सरकारी कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाजथु’ (Tamil Thaai Vazhthu), जिसे तमिल राज्यगीत भी कहा जाता है, जो सबसे पहले गए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। सीएम विजय की सरकार ने सोमवार को विधानसभा में प्रस्ताव पारित करते हुए राज्यगीत को सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में अनिवार्य करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हालांकि इस फैसले पर केंद्र सरकार से टकराव हो सकता है।
केंद्र सरकार ने पिछले महीने देश में सभी सरकारी और सार्वजनिक आयोजनों में राष्ट्रगीत (National Song) और राष्ट्रगान (National Anthem) को लेकर अलग-अलग राज्यों में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं पर विराम लगा दिया था। गृह मंत्रालय ने इसके लिए एक विस्तृत निर्देश जारी करते हुए राष्ट्रगीत वंदे मातरम् (Vande Mataram) और राष्ट्रगान जन गण मन (Jana Gana Mana) के प्रस्तुतीकरण का एक समान और अनिवार्य प्रोटोकॉल तय किया। इस प्रोटोकॉल के अनुसार अगर किसी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों होने हैं, तो हमेशा राष्ट्रगीत पहले और राष्ट्रगान बाद में होगा। जिन राज्यों में राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के साथ वहाँ का राज्यगीत भी गाया जाता है तो वहाँ भी यही क्रम रहेगा। विजय सरकार का फैसला केंद्र सरकार के प्रोटोकॉल के खिलाफ है और ऐसे में टकराव संभव है।
दरअसल विवाद की शुरुआत मई में विजय के शपथ ग्रहण समारोह से हुई थी। वहाँ केंद्र सरकार के प्रोटोकॉल के अनुसार पहले वंदे मातरम् और फिर राष्ट्रगान जन गण मन बजाया गया, जबकि तमिल थाई वाजथु बाद में बजाया गया। इसके बाद तमिलनाडु में विवाद शुरू हो गया और राज्यगीत को पहले स्थान पर रखने की मांग तेज़ हुई। जून में मद्रास हाईकोर्ट ने भी केंद्र और राज्य सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें तमिल राज्यगीत को सरकारी समारोहों में सबसे पहले गाने की मांग की गई थी। सीएम विजय ने सोमवार को विधानसभा में इस संबंध में सरकारी प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। प्रस्ताव में राज्य के शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और सार्वजनिक संस्थानों के कार्यक्रमों की शुरुआत तमिल थाई वाजथु से करने की बात कही गई है।
Updated on:
11 Aug 2026 01:19 am
Published on:
11 Aug 2026 01:17 am
