
बिकाश रंजन भट्टाचार्य और तसलीमा नसरीन (फोटो सोर्स - एएनआई/आईएएनएस)
Bikash Ranjan Bhattacharya on Taslima Nasrin: बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन की भारत वापसी को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वरिष्ठ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) नेता बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा सरकार तसलीमा नसरीन को तब तक संरक्षण देगी, जब तक वह हिंदू कट्टरपंथियों के खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वाम मोर्चा सरकार ने उन्हें कभी जबरन देश से बाहर नहीं निकाला था बल्कि उनकी सुरक्षा को देखते हुए ऐसा कदम उठाया गया था।
कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने कहा दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग भारत आए हैं और यहां की संस्कृति में घुल-मिल गए हैं लेकिन किसी भी तरह के कट्टरपंथ के लिए यहां कोई जगह नहीं है। तसलीमा नसरीन का स्वागत है। भाजपा सरकार निश्चित रूप से उनका संरक्षण करेगी लेकिन तब तक, जब तक वह हिंदू कट्टरपंथियों के खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगी।
माकपा नेता ने कहा कि वाम मोर्चा सरकार के दौरान कट्टरपंथी ताकतों से तसलीमा नसरीन की जान को खतरा था। उन्होंने दावा किया कि उस समय उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए और उन्हें सुरक्षित तरीके से देश से बाहर जाने में मदद की गई।
उन्होंने कहा, "तसलीमा नसरीन को जबरन नहीं निकाला गया था। वह विदेशी नागरिक थीं और राज्य सरकार के पास उन्हें जबरन देश से बाहर भेजने का अधिकार नहीं था। यह फैसला केवल उनकी सुरक्षा के लिए लिया गया था। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो उनकी जान को खतरा हो सकता था।" भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि उस समय कट्टरपंथी ताकतों को आरएसएस और तृणमूल कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था।
बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल में शुरू हो रही जनगणना का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया काफी पहले पूरी हो जानी चाहिए थी क्योंकि देश में हर 10 साल में जनगणना होती है। वहीं परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसकी फिलहाल कोई जरूरत नहीं है और इसका जनगणना से कोई संबंध नहीं है।
Updated on:
02 Aug 2026 08:27 pm
Published on:
02 Aug 2026 08:27 pm
