Happy Teachers Day 2021 : सचिन (sachin tendulkar) पर पूरा भरोसा करते थे गुरु/कोच रमाकांत आचरेकर।रमाकांत आचरेकर (ramakant achrekar) के एक थप्पड़ ने बदल दी थी सचिन की जिंदगी।
Teachers Day Special : नई दिल्ली । कहते हैं गुरु का हमारे जीवन में विशेष योगदान होता है। गुरु ही हमारे भविष्य की दिशा तय करता है। महान गुरुओं ने ऐसे शिष्य दिए जिन्होंने दुनियाभर में अपने गुरु, अपने देश और खुद का नाम रौशन किया। ऐसे ही गुरु-शिष्य हैं रमाकांत आचरेकर (ramakant achrekar) और भारत रत्न क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर (Bharat Ratna Cricketer Sachin Tendulkar) । लोग सचिन को क्रिकेट का भगवान मानते हैं लेकिन सचिन अपने गुरु/कोच रमाकांत आचरेकर को अपना भगवान मानते हैं। महज 11 साल की आयु में सचिन ने अपने गुरु रमाकांत से क्रिकेट की बारीकियां सीखना शुरू कर दिया था। जानिए सचिन तेंदुलकर और रमाकांत आचरेकर से जुड़ी कुछ खास बातें ।
आचरेकर के भरोसेमंद शिष्य से सचिन -
क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर सचिन पर बहुत भरोसा करते थे। इसी भरोसे के चलते आचरेकर ने सचिन पर खूब महेनत की और देश को एक महान खिलाड़ी दिया। आचरेकर सचिन की बैटिंग अभ्यास पर पूरा ध्यान देते थे। वह सचिन की बैटिंग के लिए कई मैदानों में व्यवस्था करके रखते थे। एक मैदान पर बल्लेबाजी खत्म होने के बाद सचिन को लेकर आचरेकर दूसरे मैदान में पहुंच जाते थे। इस तरह से सचिन को खूब अभ्यास करने का मौका मिलता था।
एक थप्पड़ ने किया बदलाव -
कहते हैं आचरेकर के एक थप्पड़ ने सचिन की जिंदगी में बड़ा बदलाव किया। एक बार सचिन अपनी बैटिंग प्रैक्टिस छोड़कर हैरिस शील्ड टूर्नामेंट का फाइनल देखने चले गए। वहां सचिन को कोच आचरेकर दिखाई दिए तो सचिन उनसे मिलने चले गए, लेकिन आचरेकर को पता चला कि सचिन प्रैक्टिस छोड़ कर मैच देखने आए हैं तो उन्होंने सचिन को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया। इसके बाद सचिन अपनी प्रैक्टिस को लेकर काफी गंभीर हो गए। जिसका उनके खेल पर बहुत सकारात्मक असर हुआ।
कोच आचरेकर ने नहीं की सचिन की सराहना-
सचिन को दुनियाभर में महान क्रिकेटर, क्रिकेट का भगवान, मास्टर ब्लास्टर, कई तरह से सराहना मिली, लेकिन कहा जाता है कि उनके कोच आचरेकर ने कभी भी सचिन की सराहना नहीं की। सचिन ने खुद भी इस बात का खुलासा किया कि उनके गुरु ने कभी भी उन्हें 'वेल प्लेड' नहीं बोला। सचिन कहते हैं कि आचरेकर शायद इसलिए ऐसा नहीं बोलते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि ऐसा बोलने से सचिन अपने खेल को हल्के में लेने लगेंगे। आचरेकर बचपन में भी सचिन को अच्छा खेलने की बधाई नहीं देते थे।
सचिन के अच्छे खेल पर ऐसे जाहिर करते थे खुशी-
आचरेकर ने भले ही सचिन की कभी खुलकर सीधे तौर पर सराहना न की हो लेकिन जब वो सचिन के अच्छे खेल से खुश होते थे तो खुशी का इजहार अलग तरीके से करते थे। जिससे सचिन को पता चल जाता था कि आज मैदान में उन्होंने कुछ अच्छा किया है। सचिन जब अच्छा खेलते थे तब उनके गुरु सचिन को लेकर भेल-पूरी या फिर पानी-पूरी की दुकान पर जाते थे। वहां पहुंचकर सचिन को एहसास हो जाता था कि आज उनके गुरु काफी खुश हैं।