
तेजस्वी यादव। (Photo-ANI)
बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की रणनीति ने दक्षिण में कमाल कर दिखाया है। कांग्रेस (यूडीएफ) के साथ गठबंधन न करने के बावजूद राजद (RJD) ने कुथुपरम्बा (Kuthuparamba) सीट पर जीत दर्ज की है। यह राजद के लिए केरल जैसे राज्य में पहली बड़ी सफलता मानी जा रही है।
राजद ने केरल में एलडीएफ (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट, सीपीआई(एम) के नेतृत्व) के साथ गठबंधन किया था। उसने तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे। कुथुपरम्बा सीट पर राजद के पीके प्रवीण ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (कांग्रेस गठबंधन) की जयंती राजन को हराया।
वहीं, केरल में अन्य दो सीटों (वडकारा और कलपेट्टा) पर राजद उम्मीदवार पीछे रहे, लेकिन कुथुपरम्बा में 'लालटेन' जल गई। तेजस्वी यादव ने खुद इस सीट पर प्रचार किया था। अप्रैल में उन्होंने केरल जाकर एलडीएफ के पक्ष में रैली की और विकास, सेकुलरिज्म पर जोर दिया।
बिहार में कांग्रेस के साथ गठबंधन रखते हुए तेजस्वी ने केरल में राहुल गांधी की कांग्रेस (यूडीएफ) के खिलाफ एलडीएफ का साथ चुना। उन्होंने कहा था कि एलडीएफ ने अच्छा काम किया है, इसलिए तीसरी बार सरकार बननी चाहिए। इस फैसले ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किए, लेकिन राजद को एक सीट पर सफलता मिल गई।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि बिहार में कांग्रेस के साथ गठबंधन रखते हुए तेजस्वी ने केरल में राहुल गांधी की कांग्रेस (यूडीएफ) के खिलाफ लेफ्ट (एलडीएफ) का साथ चुना।
उन्होंने साफ कहा था कि एलडीएफ ने पिछले समय अच्छा काम किया है, इसलिए उन्हें तीसरी बार मौका मिलना चाहिए। यह फैसला विपक्षी एकता पर सवाल जरूर खड़ा करता है, लेकिन तेजस्वी की नजर में स्थानीय स्थिति ज्यादा महत्वपूर्ण थी। उन्होंने रणनीति बनाई और उस पर अडिग रहे।
कई राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि तेजस्वी यादव अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि बनाने की कोशिश कर रहे हैं। केरल जैसे राज्य में प्रचार करना और गठबंधन का फैसला लेना उनकी दूरदर्शिता को दिखाता है।
हालांकि, कुछ लोग कहते हैं कि विपक्षी दलों के बीच ऐसे अलग-अलग रुख से INDIA गठबंधन की एकता पर असर पड़ सकता है। फिर भी, राजद के कार्यकर्ता इस जीत पर जश्न मना रहे हैं और इसे तेजस्वी की जीत बता रहे हैं।
यह जीत राजद को नई ऊर्जा देगी। तेजस्वी अब और ज्यादा राज्यों में सक्रिय हो सकते हैं। बिहार में भी उनकी यह सफलता छवि को मजबूत करेगी। केरल के नतीजे साफ बताते हैं कि राजनीति में कभी-कभी स्थानीय जरूरतें राष्ट्रीय गठबंधनों से ऊपर होती हैं।
Published on:
04 May 2026 05:09 pm
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