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TMC सांसदों ने ममता बनर्जी को दिया धोखा! भूपेंद्र यादव से मुलाकात पर सौगत रॉय का बड़ा बयान

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि हां, मुझे भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था।

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TMC MP Saugata Roy

TMC MP Saugata Roy

TMC MP Saugata Roy Statement: तृणमूल कांग्रेस में बीते कुछ दिनों घमासान चल रहा है। विधानसभा चुनाव में हार झलने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी टूटकर बिखरती नजर आ रही है। सोमवार को तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया है। इसी बीच टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने बड़ा दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दल-बदल का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।

टीएमसी सांसदों की भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद सौगत रॉय का बड़ा बयान

टीएमसी सांसदों द्वारा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की खबरों पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पार्टी के चिन्ह पर चुनाव जीतने वाले और ममता बनर्जी के प्रचार अभियान से लाभान्वित होने वाले लोग अब भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर जा रहे हैं और अलग-अलग गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण और राजनीतिक नैतिकता के विरुद्ध है।

बीजेपी ने प्रस्ताव दिया था, मैंने ठुकरा दिया

मीडिया से बात करते हुए अनुभवी राजनेता ने जोर देकर कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि हां, मुझे भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था। लेकिन मैंने इसे ठुकरा दिया। मैं उसी पार्टी में रहूंगा जिसके चुनाव चिन्ह पर मैंने चुनाव जीता है।

बीजेपी में शामिल हो सकते है सुखेन्दु शेखर

सौगता रॉय की ये टिप्पणी राज्यसभा के एक वरिष्ठ सांसद द्वारा पार्टी से इस्तीफा देने के बाद आई है, जिन्होंने भ्रष्टाचार के सनसनीखेज आरोप लगाए थे। सुखेन्दु शेखर ने भी सांसद पद से इस्तीफा दे दिया है और एक भाजपा नेता के घर गए हैं, जिससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वे जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

सौगता रॉय ने शेखर के इस्तीफे को लेकर जताई जा रही चिंताओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने पूछा कि यह महत्वपूर्ण नहीं है। राज्यसभा के सांसद, जिन्होंने कभी चुनाव नहीं जीता… उनकी राय का क्या महत्व है?

असंतुष्ट सांसदों पर भी रखी अपनी राय

हालांकि, अन्य असंतुष्ट सांसदों के बारे में बात करते हुए उन्होंने एक गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। अपनी पार्टी की सत्ता खो देने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में हर किसी में हार स्वीकार करने की क्षमता नहीं होती। उन्होंने आगे कहा कि हालात बिगड़ने पर ऐसे लोग अपना रुख बदल लेते हैं। यही हुआ है।

सुखेन्दु राय के दल-बदल से इस बात की चर्चा और तेज हो गई है कि तृणमूल के कई सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं, जबकि इसके लगभग 80 विधायकों में से 60 पहले ही विधायक ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट का समर्थन कर चुके हैं।