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इंडिया ब्लॉक की मीटिंग से पहले TMC को बड़ा झटका, राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने दिया इस्तीफा

टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफा दिया है।

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TMC MP Sukhendu Roy on party's defeat in Bengal and mamata banerjee

TMC के राज्यसभा सांसद सुखेंदु राय (Photo- IANS)

आज नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की मीटिंग होने वाली है। इससे पहले टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफा दिया है। सुखेंदु शेखर रॉय ने हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद सांसद व ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कामकाज के तरीकों की आलोचना की थी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान बेलगाम भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून-व्यवस्था की बात कही।

ये 15 साल के अराजक शासन का परिणाम

रॉय ने 4 मई को आए नतीजे को के "15 साल के अराजक शासन" का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के हालिया चुनाव में लोगों ने राज्य के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में भारी जनादेश दिया है। यह जनादेश तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के अराजक शासन को खत्म करने के लिए है, जो बड़े पैमाने पर बेलगाम भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून-व्यवस्था, रोज़गार आदि के क्षेत्रों में बुरी तरह विफल रही।

रॉय ने नई चुनी गई BJP सरकार की भी तारीफ की और उन्हें अपने घोषणापत्र के अनुसार राज्य के विकास के लिए कदम उठाने का श्रेय दिया। उन्होंने आगे कहा कि इस बीच, नई चुनी गई जन-सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र के अनुसार पश्चिम बंगाल के समग्र विकास और पुनर्निर्माण के लिए पहल शुरू कर दी है। लोगों के इस ऐतिहासिक फैसले का सम्मान करते हुए, मैंने आज राज्यसभा (राज्यों की परिषद) की सदस्यता और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है।

20 लोकसभा सांसदों के भी पाला बदलने की संभावना

सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफ़ा ऐसे समय में आया है जब TMC के 20 लोकसभा सांसदों के अलग होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। यह अटकलें पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी से निकाले गए विधायक रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में हुए हालिया विद्रोह के बाद शुरू हुईं। पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण TMC से निकाले गए बनर्जी ने 58 विधायकों के समर्थन से पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक अलग गुट बनाया और बाद में शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह विपक्ष के नेता चुने गए। रिताब्रत बनर्जी का गुट खुले तौर पर अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व की आलोचना कर रहा है और हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के लिए उन्हें ज़िम्मेदार ठहरा रहा है।