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कश्मीर में टूरिज्म ठप: घोड़ेवालों से केसर किसानों तक, सबकी आजीविका पर संकट

पहलगाम में घोड़ेवाले रफीक ने बताया कि हर साल टूरिज्म सीजन में हम 50 हजर से अधिक महीने में कमा लेते थे। इस बार घोड़े के चारे के पैसे भी नहीं हैं।

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कश्मीर में पर्यटन की रफ्तार पर आतंकी हमले ने गहरा असर डाला है। श्रीनगर के ट्रांसपोर्टर आमिर खताब बताते हैं कि 2017 में जहां 14.88 लाख नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा 27.29 लाख तक पहुंच गया। अधिकांश ट्रांसपोर्टर लोन लेकर वाहन खरीदते हैं, लेकिन काम ठप होने से किश्त चुकाना मुश्किल हो रहा है। पहलगाम के घोड़ेवाले रफीक और पंपोर के केसर किसान डार जैसे लोग भी इस मंदी से जूझ रहे हैं। कश्मीर ट्रेडर्स एंड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अनुसार, घाटी की टूरिज्म इकोनॉमी हर साल 18,500 से 21,200 करोड़ तक की होती है, जिससे 2.5 लाख लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। पर्यटन ठप होने से कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।

ऐसे हुआ अर्थव्यवस्था को नुकसान

पर्यटक नहीं आए, ट्रांसपोर्टर परेशान

ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करने वाले श्रीनगर के आमिर खताब कहते हैं कि कश्मीर में पर्यटन का विकास तेजी से हो रहा है। नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। 2017 में 14.88 लाख नई गाडिय़ों का रजिस्ट्रेशन हुआ था, 2024 में दोगुना होकर 27.29 लाख हो गया। 80 फीसदी ट्रांसपोर्टर बैंक से लोन लेकर गाड़ी लेते हैं। काम नहीं होगा तो लोन कैसे भरेंगे।

घोड़ेवाले, सेबवाले, केसरवाले परेशान

पहलगाम में घोड़ेवाले रफीक ने बताया कि हर साल टूरिज्म सीजन में हम 50 हजर से अधिक महीने में कमा लेते थे। इस बार घोड़े के चारे के पैसे भी नहीं हैं। पुलवामा जिले के पंपोर के केसर किसान डार बताते हैं कि इस बार खरीद और रिटेल सेल आधी हो गई है।

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पर्यटक नहीं आए तो अर्थव्यवस्था पर संकट

कश्मीर ट्रेडर्स एंड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंटयासीन खान बताते हैं कि कश्मीर की टूरिज्म इकोनॉमी हर साल करीब 18,500 से 21,200 करोड़ रुपए तक की होती है। जम्मू-कश्मीर की कुल जीएसडीपी का 8 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ पर्यटन से आता है। इस हमले से बड़ा संकट पैदा हो गया है। करीब 2.5 लाख लोगों की आजीविका इससे प्रभावित हुई है।

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