15 मार्च 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हिमालयी क्षेत्र में पेड़ हुए कम, आपदाओं के बढ़ने का खतरा

हिमालयी क्षेत्र में पेड़ कम हो रहे हैं जो चिंता का विषय है। कैसे? आइए जानते हैं।

less than 1 minute read
Google source verification

भारत

image

Tanay Mishra

Mar 15, 2026

Trees in Himalayan region

Trees in Himalayan region

पर्यावरण के लिए पेड़ बहुत ही ज़रूरी है और इसी वजह से ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाने की सलाह दी जाती है। लेकिन दुनियाभर में कई जगह पेड़ों की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है। भारत का हिमालयी क्षेत्र भी इसमें शामिल है, जहाँ के संवेदनशील इलाकों में पेड़ों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। केंद्र सरकार ने बताया कि पिछले दो वर्षों में हिमालयी क्षेत्र पेड़ों की संख्या लगभग 2.27% घटी है।

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े

राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 के अनुसार ट्री कवर 2021 में 15,427.11 वर्ग किलोमीटर था, जो 2023 में घटकर 15,075.5 वर्ग किलोमीटर रह गया।

चिंताजनक है स्थिति

एक्सपर्ट्स के अनुसार पेड़ों की संख्या कम होने से न केवल वन्यजीवों के आवास प्रभावित होंगे बल्कि ढलानों की स्थिरता, बारिश के पैटर्न और पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। इससे प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ेगा।

कार्बन सोखने की क्षमता स्थिर

हिमालयी वनों की कार्बन सोखने की क्षमता का भी रिपोर्ट में जिक्र किया गया। रिपोर्ट के अनुसार 2023 में इस क्षेत्र के जंगलों में कुल कार्बन स्टॉक लगभग 3,273.10 मिलियन टन आंकी गई थी, जो 2021 में दर्ज 3,272.68 मिलियन टन से थोड़ी ही ज़्यादा है। अगर ट्री कवर घटता रहा तो जंगलों की दीर्घकालिक कार्बन सिंक के रूप में क्षमता कमजोर हो सकती है।