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केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल बोले- ‘US-Iran War’ से भारत को शॉर्ट टर्म में कुछ नुकसान तो होगा’

Israel-Iran War: केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ऑयल-गैस रिजर्व को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। हम कई स्रोतों पर विचार कर रहे हैं।
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भारत

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Pushpankar Piyush

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Updated: 15 Mar 2026, 1:37 PM IST

Piyush Goyal

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

Israel-Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच वैश्विक संकट बरकरार है। युद्ध का असर अब भारत पर भी दिखने लगा है। हॉर्मुज स्ट्रेट में ब्लॉकेड होने के चलते LPG का संकट खड़ा हो गया है। इसी बीच भारत सरकार में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने ऑयल गैस रिजर्व को लेकर बयान दिया है।

ऑयल-गैस रिजर्व को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ऑयल-गैस रिजर्व को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन भारत को शॉर्ट टर्म में कुछ आर्थिक नुकसान उठाने पड़ सकते हैं। एक बिजनेस न्यूज चैनल के अवॉर्ड समारोह शिरकत करते हुए गोयल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते भारत पर आंशिक रूप से असर पड़ सकता है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है। इसके बुनियादी सिद्धांत भी बेहतर हैं। इसलिए लॉन्गटर्म तक इसका असर नहीं रहेगा। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर उन्होंने कहा कि मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं। यह नहीं बता सकता कि यह युद्ध कब तक चलेगा, लेकिन भारत के लोग समझते हैं कि यह एक ऐसी चुनौती है, जिसे हमें पार करना होगा।

LPG संकट पर क्या बोले गोयल

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एलपीजी आपूर्ति में किसी भी देरी की स्थिति में भारत ने केरोसिन का उत्पादन बढ़ा दिया है। हम अलग-अलग स्रोतों के माध्यम से एलपीजी और एलएनजी की आवश्यकताओं को भी पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में गैस की खेप पहुंचने में मुश्किल से तीन या चार दिन लगते हैं और ज्यादा से ज्यादा 7 दिन में आपूर्ति हो जाती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों पर भी विचार कर रही है।

जंग अब तक क्या क्या हुआ?

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (अमेरिका) और रोअरिंग लायन (इजरायल) शुरू किया। पहले ही हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई, साथ ही कई बड़े अधिकारी मारे गए। अमेरिका-इजरायल ने ईरान के मिसाइल ठिकाने, एयर डिफेंस, न्यूक्लियर साइट्स और सैन्य अड्डों पर हजारों हमले किए।

वहीं, ईरान ने जवाब में इजरायल पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए। साथ ही अमेरिकी बेस (बहरीन, कतर, यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन, इराक आदि) और उनके सहयोगी देशों पर हमले किए। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ब्लॉकेड की स्थिति पैदा कर दी है। जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। भारत में एलपीजी संकट दिख रहा है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें दिख रही है।

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