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Book Review: ‘उसने बुलाया था’ सिर्फ सस्पेंस थ्रिलर नहीं, लड़कियों की दास्तां है

Usne Bulaya Tha Book Review: पिछले दो महीनों से सोशल मीडिया पर युवा लेखक पीयूष पांडे का ये सस्पेंस थ्रिलर खूब चर्चा पा रहा है...

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Book Review

Book Review

शीर्षक: उसने बुलाया था
लेखक: पीयूष पांडे
प्रकाशक: पेंगुइन स्वदेश
विधा: सस्पेंस थ्रिलर
कीमत : 223 रुपए
Usne Bulaya Tha Book Review: हिंदी साहित्य में जब कोई उपन्यास रहस्य, रोमांच और मनोविज्ञान के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी छूता है, तो वह केवल मनोरंजन नहीं करता, बल्कि पाठक को सोचने पर भी मजबूर करता है। युवा लेखक पीयूष पांडे का उपन्यास 'उसने बुलाया था' इसी तरह की एक प्रभावशाली रचना है, जो अपराध, भावनात्मक उलझनों और स्त्री-संघर्ष की परतों को एक साथ खोलता है।

यह उपन्यास एक ऐसी युवा लड़की की कहानी है जो अमेरिका से भारत लौटकर मनोवैज्ञानिक विषय पर विशेष पीएचडी कर रही है। उसका अकादमिक जीवन अनुशासित है, शोध सुचारु रूप से चल रहा है। लेकिन उसकी यह व्यवस्थित दुनिया तब हिल जाती है, जब नोएडा के एक इलाके में एक लाश बरामद होती है- और किसी रहस्यमय तरीके से उसका सिरा नायिका की प्रयोगशाला से जुड़ जाता है, जहां वो अलग अलग मेहमानों को बुलाकर उनका व्यवहार रिकॉर्ड करती थी।

यहीं से कहानी एक साधारण शैक्षणिक जीवन से निकलकर रहस्य, रोमांच और सस्पेंस थ्रिलर का रूप ले लेती है। सवाल उठता है-
क्या लाश का प्रयोगशाला से जुड़ाव केवल एक संयोग है?
या फिर किसी गहरी साज़िश का हिस्सा?
और सबसे अहम सवाल— आखिर दोषी है कौन?

'उसने बुलाया था' सिर्फ एक थ्रिलर या प्रेम कथा नहीं (Usne Bulaya Tha Book Review)

लेखक पीयूष पांडे इस रहस्य को बेहद सधे हुए ढंग से आगे बढ़ाते हैं। हर अध्याय के साथ कहानी नई परतें खोलती है और पाठक को अगले पन्ने तक खींच ले जाती है। हत्या की जांच, संदेह, डर और अनिश्चितता के बीच उपन्यास में एक रोमांटिक आयाम भी जुड़ता है, जो कहानी को भावनात्मक गहराई देता है। लेकिन 'उसने बुलाया था' सिर्फ एक थ्रिलर या प्रेम कथा नहीं है। यह सामाजिक सरोकारों से जुड़ी एक अहम कहानी भी है।

यह हर उस भारतीय लड़की की कहानी है, जो हिन्दुस्तान के सामाजिक परिवेश में कुछ समझौतों के साथ जी रही है, और ऐसा करना उसकी मजबूरी है। यह कहानी हज़ारों भारतीय लड़कियों की प्रतिनिधि बनती है, जो आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी राह तलाश रही हैं।

पीयूष पांडे की भाषा इस उपन्यास की बड़ी ताक़त है। उनकी हिंदी सहज, आधुनिक और संवादात्मक है। पात्रों की बातचीत स्वाभाविक लगती है और उनके भावनात्मक उतार-चढ़ाव पाठक तक सीधे पहुँचते हैं। खास तौर पर मुख्य महिला पात्र की मनोवैज्ञानिक स्थिति को लेखक ने गहराई से उकेरा है। उसकी पीएचडी केवल एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उसके भीतर चल रहे मानसिक संघर्षों का भी प्रतीक बन जाती है।

रोमांस फिल्मी टाइप नहीं है (Usne Bulaya Tha Book Review)

कहानी की गति तेज़ नहीं, बल्कि सस्पेंस-आधारित है। लेखक घटनाओं से ज़्यादा भावनात्मक असर पर ज़ोर देते हैं, जिससे रहस्य केवल दिमाग़ से नहीं, दिल से भी जुड़ता है। रोमांस भी कहानी में मौजूद है, लेकिन वह फिल्मी नहीं लगता। वह परिस्थितियों से जन्म लेता है—अनकहे जज़्बातों और अधूरे भरोसे के बीच।

'उसने बुलाया था' पेंगुइन स्वदेश ने प्रकाशित की है, लेकिन एक दो जगह प्रूफ की गलतियां खटकती हैं। कुछ पात्रों को थोड़ा और विस्तार मिल सकता था, लेकिन इसके बावजूद कहानी अपनी पकड़ बनाए रखती है। खासकर अंतिम हिस्से में रहस्य का खुलासा पाठक को चौंकाता भी है और सोचने पर मजबूर भी करता है।

'उसने बुलाया था' उन पाठकों के लिए एक बेहतरीन उपन्यास है जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि रहस्य, मनोविज्ञान और सामाजिक संवेदनाओं से जुड़ी कहानी पढ़ना चाहते हैं। कुल मिलाकर, पीयूष पांडे का यह उपन्यास सिर्फ मनोरंजन नहीं करता बल्कि उस सवाल से गहरे जुड़ता है, जिसकी हम बात नहीं करना चाहते।