
मणिपुर में जवान। (Photo-IANS)
गुवाहाटी हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस अजय लांबा ने मणिपुर हिंसा की जांच कर रहे कमीशन ऑफ इन्क्वायरी के चेयरपर्सन पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद सरकार ने उनकी जगह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बलबीर सिंह चौहान को नियुक्त किया है।
जस्टिस लांबा 3 जून, 2023 को इस पद पर नियुक्त हुए थे। फिलहाल यह पता नहीं चला पाया है कि उन्होंने मणिपुर हिंसा की जांच से खुद को अलग क्यों किया है।
गृह मंत्रालय ने गुरुवार को एक नोटिफिकेशन में कहा- मणिपुर में हिंसा की घटनाओं के एक खास मामले की जांच करने के मकसद से बनाए गए जांच कमीशन के चेयरपर्सन पद से जस्टिस लांबा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इसके बाद केंद्र सरकार 28 फरवरी से जस्टिस चौहान को कमीशन का चेयरपर्सन अपॉइंट करती है।
मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया है कि कमीशन के टर्म्स ऑफ रेफरेंस और दूसरी शर्तें वैसी ही रहेंगी। रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर हिमांशु शेखर दास और पूर्व आईपीएस ऑफिसर आलोक प्रभाकर कमीशन के मेंबर बने रहेंगे, जिसका हेडक्वार्टर इंफाल में है।
मणिपुर में साल 2023 में भयंकर हिंसा हुई थी। तब मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच टकराव हुआ था। बता दें कि पिछले दशकों में मणिपुर में कई बार जातीय हिंसा भड़की है। जैसे कि साल 1990 के दशक में, तब कुकी-नागा के बीच टकराव हुआ।
हालांकि, 2023 की हिंसा सबसे गंभीर है, जो एक कानूनी फैसले से भड़की। राज्य में भूमि कानून ऐसे हैं कि पहाड़ी इलाकों में मैतेई लोग जमीन नहीं खरीद सकते, जबकि घाटी में कोई प्रतिबंध नहीं है। यह असमानता संघर्ष का एक बड़ा कारण है।
मणिपुर में मैतेई समुदाय लंबे समय से खुद को एसटी कैटेगरी में शामिल करने की मांग कर रहा है। इससे उन्हें सरकारी नौकरियों, शिक्षा में आरक्षण और पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीदने का अधिकार मिल जाता।
14 अप्रैल 2023 को मणिपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई को एसटी स्टेटस देने की सिफारिश करने का निर्देश दिया। कुकी और नागा जैसे आदिवासी समुदायों ने इसका विरोध किया, क्योंकि उन्हें लगा कि इससे उनकी जमीन, संसाधन और अवसर छिन जाएंगे। जिसपर बवाल बढ़ गया।
Updated on:
26 Feb 2026 08:38 pm
Published on:
26 Feb 2026 06:53 pm
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