
सुप्रीम कोर्ट में महाशिवरात्रि के मौके पर तेलंगाना के एक शिव मंदिर का मामला पहुंचा है। मंदिर के पुजारियों का आरोप है कि तेलंगाना सरकार गैरकानूनी रूप से मंदिर को टेकओवर करना चाहती है। इसे लेकर सरकार की ओर से एक एग्जीक्यूटिव अधिकारी की नियुक्ति की है। एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने इन आदेशों पर रोक भी लगा दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1987 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका मछलीलेश्वरनाथ मंदिर के नाम से जाने जाने वाले श्री वीरभद्र स्वामी मंदिर के पुजारियों की ओर से तेलंगाना के खिलाफ दायर की गई थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखिकजा ने कहा कि इन विवादित आदेशों के माध्यम से, तेलंगाना सरकार उक्त मंदिर पर कब्जा करने और याचिकाकर्ताओं को हटाने का प्रयास कर रही है।
इसके अलावा, अधिनियम को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह सरकार को निरंकुश शक्ति देता है, क्योंकि यह बिना किसी कारण के किसी भी मंदिर के प्रबंधन को बदल सकता है। याचिका में पन्नालाल बंसीलाल पिट्टी बनाम आंध्र प्रदेश राज्य, (1996) 2 एससीसी 498 के मामले का उल्लेख करते हुए तर्क दिया गया है कि मंदिरों को चलाना एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के अधिकारियों का काम नहीं है। इसके अलावा, यह भी तर्क दिया गया है कि मंदिर का प्रबंधन और प्रशासन धर्म के अधिकार का एक अनिवार्य हिस्सा है।
Published on:
08 Mar 2024 03:47 pm
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