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संघ को BJP के चश्मे से देखना गलत, बार-बार ऐसा क्यों कर रहे हैं RSS चीफ मोहन भागवत?

RSS chief Mohan Bhagwat: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ को बीजेपी के चश्मे से देखना गलत होगा। उन्होंने कहा कि संघ एक अनोखा संगठन है। पढ़ें संघ प्रमुख ने ऐसा क्यों कहा...

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Mohan Bhagwat in raipur

RSS प्रमुख मोहन भागवत

RSS chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ को बीजेपी के चश्मे से देखना गलत है। भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक अनोखा संगठन है और इसका जन्म किसी भी चीज के "विरोध या प्रतिक्रिया" के रूप में नहीं हुआ था। भोपाल में उन्होंने एक बार फिर कहा कि अगर आप BJP को देखकर संघ को समझना चाहते हैं, तो यह एक बहुत बड़ी गलती होगी। अगर आप विद्या भारती (RSS से जुड़ा एक संगठन) को देखकर इसे समझने की कोशिश करेंगे तो भी यही गलती होगी।

हिंदू हितों की रक्षा के लिए बना है संघ

मोहन भागवत ने कहा कि संघ का निर्माण हिंदुओं के हितों की रक्षा के लिए हुआ है। संघ किसी के भी विरोध में नहीं बना है। मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को एक साथ लाने और मूल्यों और अनुशासन को स्थापित करने का काम करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत एक बार फिर विदेशी शासन के अधीन न हो जाए।

संघ प्रमुख ने कहा कि हम वर्दी पहनते हैं। मार्च निकालते हैं। लाठी का अभ्यास करते हैं। अगर कोई यह सोचता है कि हम एक अर्धसैनिक संगठन है तो यह उनकी गलती हैं। RSS एक अनोखा संगठन है। भागवत ने कहा कि RSS के बारे में एक झूठी कहानी गढ़ी जा रही है।

संघ के बारे में विकिपीडिया पर जाना गलत

भागवत ने कहा कि आजकल लोग सही जानकारी इकट्ठा करने के लिए गहराई में नहीं जाते हैं। वे मूल स्रोत तक नहीं जाते हैं। वे विकिपीडिया पर जाते हैं। वहां सब कुछ सच नहीं होता। जो लोग विश्वसनीय स्रोतों पर जाएंगे, उन्हें संघ के बारे में पता चलेगा।
भागवत ने कहा कि इन गलतफहमियों के कारण RSS की भूमिका और उद्देश्य को समझाना महत्वपूर्ण हो गया था> उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देश भर में अपनी यात्राओं का जिक्र किया।

RSS प्रमुख ने कहा कि एक आम भावना है कि संघ का जन्म मौजूदा ताकतों के विरोध या प्रतिक्रिया के रूप में हुआ था। ऐसा नहीं है। संघ किसी भी चीज का विरोध या प्रतिक्रिया नहीं है। संघ किसी से प्रतिस्पर्धा भी नहीं कर रहा है।

स्वदेशी अभिायन पर क्या बोले भागवत

मोहन भागवत ने स्वदेशी सामानों की वकालत की है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनने के लिए आत्म गौरव होना जरूरी है। हम भारत में निर्मित सामान खरीदें। इससे देश में रोजगार बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि स्वदेशी होने का मतलब यह नहीं है कि आप दुनिया के साथ व्यापार बंद कर दें। सिर्फ जरूरी चीज़ें ही इंपोर्ट करें, जैसे दवाएं जो भारत में नहीं बनतीं। RSS प्रमुख ने आगे कहा कि व्यापार कभी भी दबाव या टैरिफ के डर से नहीं किया जाना चाहिए, और यह सिर्फ भारत की अपनी शर्तों पर होना चाहिए।