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दबाव, धमकी और दलबदल: सुबेंदु ने बताया कैसे बीजेपी को तोड़ने में जुटी है बंगाल पुलिस

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष के नेता सुबेंदु अधिकारी ने महिषादल थाना प्रभारी पर भाजपा नेताओं को TMC में शामिल होने के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया है।

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सुबेंदु अधिकारी (IANS)

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुबेंदु अधिकारी ने आज अपने गृह जिला पूर्व मिदनापुर के महिषादल थाना के प्रभारी पुलिस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता को व्हाट्सएप कॉल कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

अधिकारी का पुलिस पर आरोप

अधिकारी ने आरोप लगाया कि जिस दिन भाजपा की तरफ से उम्मीदवारों की सूची जारी की गई, उसके कुछ ही क्षणों बाद महिषादल थाना का प्रभारी वरिष्ठ भाजपा नेता बिस्वनाथ बनर्जी को कॉल कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव दे रहा था। सुबेंदु अधिकारी ने स्पष्ट कहा जबसे मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू है, एक पुलिस अधिकारी इस तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

मामले पर पूछताछ

सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष के नेता सुबेंदु अधिकारी सुबह महिषादल थाना पहुंचे और वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों से थाना प्रभारी से मुलाकात कर मामले पर स्पष्टीकरण मांगना चाहते थे। लेकिन उस समय संबंधित प्रभारी पदस्थ नहीं थे। इसलिए उन्होंने ड्यूटी इंचार्ज से बातचीत की और थाना प्रभारी को स्पष्ट संदेश देने का अनुरोध किया कि वे भविष्य में भाजपा नेताओं को कॉल करके उन्हें किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने के लिए न कहें।

अभियुक्त को चेतावनी

सुबेंदु अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज मैंने आरोपी थाना प्रभारी को शिष्टाचारपूर्वक चेतावनी दी। लेकिन अगर भविष्य में फिर से ऐसी घटनाएं होती हैं, तो हम यह मामला भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तमलुक के एक उप-प्रभागीय पुलिस अधिकारी ने हाल ही में कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं को अपने कार्यालय में बुलाया और उनसे जिले से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए कहा।

ECI तक जाने की चेतावनी

विपक्ष के नेता ने स्पष्ट किया कि उक्त घटना का वीडियो प्रमाण उनके पास मौजूद है और उन्होंने सभी पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों तथा नागरिक स्वयंसेवकों से अपील की कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने पर किसी भी पार्टी विशेष की ओर से गतिविधियों में हस्तक्षेप न करें। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि वे अपनी तनख्वाह राज्य कोष से प्राप्त करते हैं, न कि किसी राजनीतिक दल या बाहरी वोटिंग रणनीति एजेंसी से।