
ममता बनर्जी और अमित शाह (File Photo)
Assembly Elections2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 महज सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि राज्य की सामाजिक और राजनीतिक दिशा तय करने वाला निर्णायक मोड़ बन गया है। 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान और 4 मई को परिणाम इस बहुस्तरीय मुकाबले की तस्वीर साफ करेंगे। पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर बहुमत के लिए 148 का आंकड़ा जरूरी है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर ने चुनाव को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भावनात्मक अपील के साथ उम्मीदवारी दाखिल की है। TMC, BJP पर जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने और प्रशासनिक हस्तक्षेप के आरोप लगा रही है। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस बंगाली अस्मिता के मुद्दे को प्रमुख बनाकर चुनावी रणनीति को धार दे रही है। दूसरी तरफ BJP की तरफ से शीर्ष नेताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह लगातार रैलियां कर रहे हैं। BJP ने TMC पर अंतरराष्ट्रीय छवि खराब करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही BJP ने चुनावी घोषणापत्र में कल्याणकारी योजनाएं, सुरक्षा, शासन सुधार, घुसपैठ और भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए TMC और BJP के बीच कड़ी जुबानी जंग चल रही है। इसके अलावा बंगाल में कांग्रेस और वाम दल सीमित प्रभाव के साथ मैदान में हैं। कांग्रेस ने अपनी दूसरी सूची में 7 उम्मीदवार बदले हैं। वहीं, वाम दल कुछ क्षेत्रों तक सीमित सक्रियता दिखा रहे हैं, जिससे उनके व्यापक असर की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।
बंगाल चुनाव में SIR प्रक्रिया बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर सामने आया है। खासतौर पर TMC इसे प्रमुखता से उठा रही है। मतदाता सूची से लगभग 27 लाख नाम हटाए जाने पर विवाद गहराया है, जिस पर तृणमूल कांग्रेस ने अदालत जाने की घोषणा की है। चुनाव आयोग ने हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और डराने-धमकाने पर सख्ती के संकेत दिए हैं। इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार, घुसपैठ और रोजगार चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं। बीजेपी इन मुद्दों पर सरकार को घेर रही है, जबकि तृणमूल अपने विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं को प्रमुखता से पेश कर रही है।
Published on:
13 Apr 2026 03:50 am
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