
बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं (Photo-IANS)
West Bengal election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लंबे समय से सत्ता में हैं और अपनी पार्टी व सरकार-दोनों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। इसके बावजूद एक अहम सवाल बार-बार उठ रहा है: क्या उनकी पार्टी समेत अन्य दल महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व दे रहे हैं?
महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले नारी शक्ति वंदन कानून से उम्मीदें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन यह प्रावधान 2027 के बाद लागू होगा। यानी 2026 के विधानसभा चुनाव में इसका सीधा असर दिखाई नहीं देगा। ऐसे में, जब राज्य की बागडोर एक महिला मुख्यमंत्री के हाथ में है, तब टिकट वितरण में लैंगिक संतुलन और भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाता है।
पिछले तीन विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि लगभग सभी बड़े दल महिलाओं को टिकट देने में पीछे रहे हैं।
➡️ कोई भी दल 20% तक नहीं पहुंचा
➡️ महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद कोई पार्टी 25% तक नहीं पहुंच सकी
बता दें कि 2011, 2016 और 2021—तीनों चुनावों में पश्चिम बंगाल के किसी भी बड़े दल ने महिलाओं को 33% टिकट नहीं दिए। यहां तक कि 25% का आंकड़ा पार करना भी मुश्किल साबित हुआ।
अब 2026 का चुनाव राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ी परीक्षा होगा—क्या वे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे या फिर टिकट वितरण का पुराना पैटर्न ही जारी रहेगा?
प्रदेश में महिलाओं के लिए सीएम ममता बनर्जी ने कई योजनाएं शुरू की है। महिलाओं को आर्थिक सहयता देने के लिए लक्ष्मी भंडार योजना चालू है। वहीं कन्याश्री योजना लड़कियों की पढ़ाई जारी रखने और बाल विवाह रोकने में मदद करती है। इसके अलावा रूपश्री योजना के तहत गरीब परिवार की बेटियों को शादी के लिए अनुदान दिया जाता है। स्वास्थ्य साथी योजना में परिवार को महिलाओं के नाम पर मुफ्त इलाज का बीमा मिलता है।
Published on:
21 Feb 2026 02:23 pm
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