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बंगाल में होल्डिंग सेंटर खुलते ही सख्ती, एक दिन में 12 बांग्लादेशी हिरासत में

पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद में दो नए होल्डिंग सेंटर शुरू किए गए हैं, जहां संदिग्ध विदेशी नागरिकों को अस्थायी रूप से रखा जा रहा है।

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अवैध घुसपैठ पर बंगाल में सख्त कार्रवाई (Video Screenshot)

West Bengal Holding Centers: पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ और विदेशी नागरिकों की पहचान को लेकर प्रशासन ने सख्ती तेज कर दी है। इसी क्रम में राज्य के दो जिलों में नए ‘होल्डिंग सेंटर’ (अस्थायी डिटेंशन सुविधा केंद्र) शुरू किए गए हैं, जहां 24 घंटे के अंदर 12 संदिग्ध विदेशी नागरिकों को स्थानांतरित किया गया है। इन कदमों को अवैध प्रवासियों की पहचान, सत्यापन और प्रत्यावर्तन प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

मालदा और मुर्शिदाबाद में शुरू हुए नए होल्डिंग सेंटर

सूत्रों के अनुसार, पहला होल्डिंग सेंटर मालदा जिला के इंग्लिश बाजार में स्थापित किया गया है, जबकि दूसरा केंद्र मुर्शिदाबाद जिला के लालगोला में शुरू किया गया है। इन दोनों केंद्रों में कुल 12 संदिग्ध विदेशी नागरिकों को रखा गया है, जिनमें पुरुष, महिलाएं और नाबालिग शामिल बताए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि इन केंद्रों का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति को सजा देना नहीं, बल्कि उनकी पहचान और कानूनी स्थिति की पुष्टि कर आगे की कार्रवाई को व्यवस्थित करना है।

अवैध प्रवासियों की पहचान और सत्यापन अभियान तेज

राज्य प्रशासन ने अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए व्यापक सत्यापन अभियान शुरू किया है। जिन लोगों के पास भारत में रहने के वैध दस्तावेज नहीं पाए जाते, उन्हें जांच के बाद इन होल्डिंग सेंटरों में अस्थायी रूप से रखा जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल ही में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जिन्होंने भारत में रहने से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। इन सभी मामलों में पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संचालित हो रहे केंद्र

इन होल्डिंग सेंटरों में सुरक्षा के लिए 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी, पुलिस बल, सिविल डिफेंस कर्मियों और अन्य सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। बंदियों के लिए भोजन, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह राज्य में अपनी तरह की नई व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य कानूनी प्रक्रिया के तहत अवैध प्रवासियों की पहचान और उनके प्रत्यावर्तन को अधिक प्रभावी बनाना है।

BSF को सौंपने और डिपोर्ट की प्रक्रिया

अधिकारियों ने बताया कि पहचान पूरी होने के बाद इन संदिग्ध विदेशी नागरिकों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए सीमा सुरक्षा बल सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपा जाएगा। इसके बाद इन्हें अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय समन्वय के तहत उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

नई प्रशासनिक नीति के तहत बदलाव

राज्य में हाल ही में जारी दिशा-निर्देशों के बाद यह बदलाव देखा जा रहा है कि अब ऐसे मामलों में सीधे जेल भेजने के बजाय उन्हें विशेष होल्डिंग सेंटरों में रखा जा रहा है। इससे कानूनी प्रक्रिया, पहचान सत्यापन और प्रत्यावर्तन की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और पूरे राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए अभियान को और व्यापक किया जाएगा।