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बंगाल में BJP की जीत पर बांग्लादेश भड़का, भारत सरकार ने कहा- पहले अपने 2860 नागरिकों को वापस लो

India Bangladesh tension: पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री के बयान पर भारत का सख्त जवाब आया है। विदेश मंत्रालय ने कहा- 2860 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी में सहयोग करें।
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कोलकाता

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Mukul Kumar

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Updated: 7 May 2026, 5:34 PM IST

MEA Spokesperson Randhir Jaiswal

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल (Photo- IANS)

पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के बयान पर भारत ने तीखा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने साफ कहा कि बांग्लादेश को अब अवैध घुसपैठियों (Bangladesh illegal immigrants from India) को वापस लेने में सहयोग करना चाहिए।

बता दें कि भाजपा की चुनावी सफलता के बाद बांग्लादेश की ओर से आए कुछ बयानों पर भारत ने चिंता जताई है। रंधीर जायसवाल ने कहा कि पिछले कई दिनों से ऐसे बयान आ रहे हैं।

'असली मुद्दा भारत से अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी का'

रंधीर ने जोर देकर कहा कि असली मुद्दा भारत से अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी का है। इसके लिए बांग्लादेश का पूरा सहयोग जरूरी है।

जायसवाल ने बताया कि फिलहाल बांग्लादेश के पास 2,860 से ज्यादा मामले नेशनैलिटी वेरिफिकेशन के लंबित पड़े हैं। कई मामले तो पांच साल से भी ज्यादा पुराने हैं। भारत अब उम्मीद करता है कि बांग्लादेश इन मामलों को तेजी से निपटाए ताकि अवैध अप्रवासियों को आराम से वापस भेजा जा सके।

अवैध घुसपैठ का मुद्दा क्यों इतना गर्म?

भारत में लंबे समय से अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर चर्चा चल रही है। खासकर पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह मुद्दा संवेदनशील है। स्थानीय लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि अवैध घुसपैठ से रोजगार, संसाधन और सुरक्षा पर असर पड़ रहा है।

भाजपा सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखती है। चुनाव के दौरान भी पश्चिम बंगाल में घुसपैठ का मुद्दा जोर-शोर से उठा था। भाजपा ने इसे अपनी प्राथमिकता बताया। अब जीत के बाद बांग्लादेश की प्रतिक्रिया पर भारत ने सख्ती दिखाई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ संकेत दिया कि बिना सहयोग के यह समस्या हल नहीं होगी।

लंबित मामले और कूटनीतिक दबाव

भारत के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, कई बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की पुष्टि बांग्लादेश सरकार ने अभी तक नहीं की है। पांच साल से ज्यादा पुराने मामले दिखाते हैं कि प्रक्रिया कितनी धीमी चल रही है।

रंधीर जायसवाल ने कहा- हम बांग्लादेश से उम्मीद करते हैं कि वे इन मामलों को जल्दी निपटाएं। यह बयान सामान्य कूटनीतिक भाषा से ज्यादा सख्त माना जा रहा है। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि भारत अब इस मुद्दे को और मजबूती से उठाएगा।

दोनों देशों के रिश्तों पर क्या असर?

भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, पानी बंटवारे, सीमा सुरक्षा जैसे कई मुद्दे पहले से चल रहे हैं। अवैध घुसपैठ का मुद्दा इनमें नया जोड़ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बांग्लादेश सहयोग नहीं करता तो सीमा पर सख्ती बढ़ सकती है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा इसे अपनी जीत का नैतिक समर्थन बता रही है, जबकि विपक्षी दल इसे पड़ोसी देश के साथ रिश्तों पर असर बताते हैं।