
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 7 मई, 2026 को बिहार सरकार में मंत्री बन गए। (फोटो- IANS)
नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति में अपने बेटे की 'ग्रैंड लॉंचिंग' कर दी है। निशांत कुमार ने करीब 51 साल की उम्र में पहले पिता की पार्टी जॉइन की और कुछ ही दिन बाद मंत्री पद की शपथ ली। निशांत ने आसान लॉंचिंग तो कर ली है, लेकिन राजनीति में उनका सफर आसान नहीं रहने वाला है। निशांत की चुनौतियों के बारे में समझते हैं:
निशांत के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि पार्टी के भीतर अपनी स्वीकार्यता बनाएं। अभी उनकी स्वीकार्यता तीन कारणों से है। पहला, वह राजनीति और पार्टी में नए हैं। दूसरा, नीतीश कुमार के बेटे हैं। तीसरा, सक्रिय नहीं हैं। पिता की छाया से निकल कर अपनी जमीन बनाने के लिए वह सक्रिय होंगे तब पार्टी में स्वीकार्यता बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
इसके साथ ही, पार्टी की एकता बनी रहे, यह और भी चुनौतीपूर्ण होगा। ताजा उदाहरण ममता बनर्जी का है, जिन्होंने भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी में आगे बढ़ाया तो सुवेंदु अधिकारी भाजपा में चले गए और ममता की 15 साल पुरानी सत्ता खत्म करा दी।
बिहार में ही लालू यादव ने तेजस्वी और तेज प्रताप को आगे बढ़ाया तो उनके कई करीबी पार्टी छोड़ गए। खुद लालू के परिवार में कलह हुआ।
बीजेपी के साथ रहते हुए जेडीयू को आगे बढ़ाना अपने आप में अलग चुनौती है। खास कर तब, जब बीजेपी गठबंधन में बड़ी पार्टी हो और मुख्यमंत्री भी उसका हो। नीतीश की बढ़ती उम्र के साथ घटती सक्रियता इस चुनौती को और कठिन बनाएगा।
नीतीश कुमार ने लगातार मुख्यमंत्री रहते हुए अपना एक जनाधार और पार्टी के लिए जाति से हट कर लाभार्थियों का अलग वोट बैंक बनाया। भाजपा का सीएम रहते इस वोट बैंक को जदयू का बनाए रखना नीतीश कुमार के लिए भी बड़ी चुनौती है।
बिहार की राजनीति में निशांत का मुक़ाबला सम्राट चौधरी, तेजस्वी यादव, चिराग पासवान से होने वाला है। आज की तारीख में ये तीनों निशांत से काफी मजबूत हैं।
आज की राजनीति में छवि का भी अहम रोल है। नीतीश को मुख्यमंत्री पद से हटाने के पहले भी उनकी छवि ऐसी बनाई गई कि उनकी मानसिक हालत दुरुस्त नहीं है। निशांत की छवि अभी नेता वाली नहीं है। उस पर उन्हें काम करना है। वह इस पर कितनी जल्दी और कितना काम कर पाते हैं, इस पर उनकी राजनीतिक कामयाबी बहुत हद तक निर्भर करेगी।
अपनी जमीन बनाने की कोशिश के तहत निशांत ने यात्रा शुरू की है। इस यात्रा के नतीजे से भी यह तय होगा कि आगे उन्हें इस मोर्चे पर कितना काम करना है।
Updated on:
7 May 2026, 6:01 PM IST
Published on:
7 May 2026, 5:44 PM IST
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