
पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य । ( फोटो : ANI)
Leader: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। तृणमूल कांग्रेस के निलंबित नेता ऋजू दत्ता ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की खुले मंच से जमकर तारीफ की है। ऋजू दत्ता के इस चौंकाने वाले बयान के बाद राज्य का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। दत्ता ने मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक सफर और बायोडाटा सबसे अलग है।
ऋजू दत्ता ने अपने बयान में कहा कि अगर भारत के इतिहास में 10 सबसे बड़े राजनेताओं की सूची तैयार की जाए, तो उसमें ममता बनर्जी का नाम निश्चित रूप से शामिल होगा। लेकिन, इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तुलना करते हुए कहा कि उनका सीवी या बायोडाटा किसी अन्य नेता जैसा बिल्कुल नहीं है। टीएमसी में रहने के दौरान भी उनका रुतबा काफी बड़ा था। निलंबित नेता के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
इस पूरे सियासी घटनाक्रम पर पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। शमिक भट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को एक 'नेचुरल लीडर' (स्वाभाविक नेता) करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को चुनावी मैदान में दो बार शिकस्त दी है। भट्टाचार्य ने ऋजू दत्ता के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि दत्ता भविष्य में बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं, इसलिए वे शुभेंदु की और अधिक तारीफ करेंगे।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि टीएमसी के कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल होने के लिए कतार में खड़े हैं। उन्होंने बताया कि बीजेपी नेताओं के पास आ रहे फोन कॉल्स और कतार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी फिलहाल किसी को भी अपनी पार्टी में शामिल नहीं कर रही है। शमिक भट्टाचार्य ने अपनी पार्टी की तुलना 'मां गंगा' से करते हुए कहा कि उनके पास एक मजबूत 'फिल्टर सिस्टम' है। घाटों पर लोग तैनात हैं जो यह तय करेंगे कि गंगा में डुबकी लगाने की अनुमति किसे दी जाए।
उन्होंने साफ कर दिया कि इस समय किसी भी टीएमसी नेता के लिए बीजेपी के दरवाजे पूरी तरह से बंद हैं। टीएमसी के निलंबित नेता द्वारा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ करने पर बीजेपी खेमे में उत्साह है, वहीं टीएमसी के भीतर इस बयान को लेकर भारी असहजता देखी जा रही है। विपक्षी दल इसे टीएमसी की अंदरूनी कलह के रूप में देख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात पर पैनी नजर रख रहे हैं कि क्या ऋजू दत्ता वास्तव में बीजेपी में शामिल होने की कोई ठोस रणनीति बना रहे हैं, या यह महज अपनी पुरानी पार्टी पर दबाव बनाने का एक राजनीतिक पैंतरा है। इस पूरे विवाद ने इस बात को फिर से हवा दे दी है कि टीएमसी के अंदरखाने कई असंतुष्ट नेता दल बदलने की ताक में बैठे हैं। हालांकि, बीजेपी द्वारा घोषित 'नो एंट्री' और 'फिल्टर सिस्टम' नीति ने इन दल-बदलुओं की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं।
Updated on:
10 May 2026 06:28 pm
Published on:
10 May 2026 06:25 pm
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