
बंगाल के मुख्यमंती शुभेंदु अधिकारी और भारतीय जनता पार्टी के नेता भूपेंद्र यादव । ( फोटो: ANI)
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई है और इस प्रदेश से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सियासत के लिए ये सबसे बुरे दिन हैं। धीरे-धीरे कई नेता उनका साथ छोड़ते चले जा रहे हैं। राज्य के हालात ऐसे हैं कि सियासी गलियारों में आज एक ऐसा टीएमसी विद्रोह देखने को मिला है, जिसने तृणमूल कांग्रेस की नींव हिला कर रख दी है। विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद से ही संकट से घिरी टीएमसी के भीतर असंतोष की आग अब पूरी तरह भड़क चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, विधायक पहले ही बगावत कर चुके हैं और अब टीएमसी के करीब 21 सांसद इस समय बगावत की राह पर हैं और वे पार्टी आलाकमान से बेहद नाराज चल रहे हैं। ममता बनर्जी के 20 सांसद इस मीटिंग में पहुंचे हैं।
भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर एक बहुत गोपनीय और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बगावती तेवर अपना रहे टीएमसी के सांसदों के पहुंचने की जानकारी मिली है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी वहां खुद मौजूद रहे। शुभेंदु अधिकारी और भूपेंद्र यादव की उपस्थिति में टीएमसी सांसदों का इस तरह पहुंचना साफ संकेत दे रहा है कि राज्य में बहुत जल्द 'खेला' होने वाला है।
गौरतलब है कि ऐसा पहली बार नहीं है जब तृणमूल कांग्रेस के अंदर इस तरह की फूट देखी जा रही है। विधानसभा चुनाव में हार मिलने के तुरंत बाद से ही पार्टी के विधायकों ने बागी रुख अख्तियार कर लिया था। विधायकों के विरोध के बाद अब यह संकट सीधे केंद्रीय स्तर यानि सांसदों तक पहुंच चुका है। अब सांसदों का एक साथ बागी होना ममता बनर्जी के लिए किसी बड़े राजनीतिक झटके से कम नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये सांसद बीजेपी का दामन थाम लेते हैं, तो राज्य की राजनीति में पूरी तरह से तख्तापलट की स्थिति पैदा हो सकती है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि चुनाव में मिली हार के बाद से ही स्थानीय नेताओं और सांसदों में असंतोष की भावना घर कर गई थी। केंद्रीय नेतृत्व की कार्यप्रणाली और फैसलों को लेकर सांसद लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे। अब जब ये सांसद सीधे बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और शुभेंदु अधिकारी के संपर्क में आ चुके हैं, तो कयास लगाए जा रहे हैं कि आज ही कोई बड़ा आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी खेमे में जहां भारी उत्साह देखा जा रहा है, वहीं टीएमसी नेतृत्व पूरी तरह से बैकफुट पर आ गया है। बीजेपी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है, ममता बनर्जी की तानाशाही नीतियों के कारण पूरी पार्टी ताश के पत्तों की तरह ढहने वाली है। दूसरी ओर, टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने इस बैठक को विपक्षी ताकतों की एक साजिश करार दिया है और दावा किया है कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है।
भूपेंद्र यादव के आवास के बाहर मीडिया का भारी जमावड़ा लगा हुआ है। बैठक खत्म होने के बाद शुभेंदु अधिकारी और बागी सांसदों की तरफ से एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की जा सकती है, जिसमें बंगाल की नई राजनीतिक दिशा और पार्टी परिवर्तन को लेकर बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है।
इस पूरे सियासी ड्रामे का एक पहलू यह भी है कि यदि 21 सांसद एक साथ इस्तीफा देते हैं या बीजेपी में शामिल होते हैं, तो लोकसभा में भी दलीय स्थिति पर इसका व्यापक असर पड़ेगा। यह घटना न केवल बंगाल बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्षी एकता के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।
Updated on:
8 Jun 2026, 3:00 PM IST
Published on:
8 Jun 2026, 2:48 PM IST
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