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WFI ROW: गवाही देने वाली महिला पहलवानों को धमका रहे थे बृजभूषण के करीबी, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

WFI Controversies: महिला पहलवानों से यौन शोषण के आरोप में रेसलिंग फेडरेशन के पूर्व चीफ बृजभूषण शरण सिंह फंसते दिख रहे हैं। 1500 पेज की चार्जशीट में से कई जानकारियां धीरे-धीरे छनकर बाहर आ रही हैं। इस बीच, पता चला है कि जिस समय महिला पहलवान सिंह के खिलाफ बयान दर्ज करा रही थीं, उस समय उन्हें धमकाने की कोशिश हुई थी।

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WFI ROW: गवाही देने वाले महिला पहलवानों को धमका रहे थे बृजभूषण के करीबी, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

WFI ROW: गवाही देने वाले महिला पहलवानों को धमका रहे थे बृजभूषण के करीबी, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

WFI Controversies: भारतीय रेसलिंग फेडरेशन के पूर्व चीफ बृजभूषण शरण सिंह के बारे में दायर आरोपपत्र से रोज कुछ नई जानकारी निकल के सामने आ रही है। छह महिला पहलवानों से यौन उत्पीड़न के लगे आरोप में सिंह को लेकर नया खुलासा हुआ है। बृजभूषण के करीबियों ने कथित तौर पर कई मौकों पर शिकायत करने वाली महिलाओं पहलवानों को धमकाने की कोशिश की थी। एक दायर शिकायत के मुताबिक जब भी महिलाएं सरकार की ओर से गठित समिति के सामने सिंह के खिलाफ बयान देने जाती थीं, तो उन्हें डराने की कोशिश की जाती थी। सिंह के खिलाफ धरना में मुख्य भूमिका निभाने वाली एक शिकायतकर्ता ने कमेटी को जो ईमेल भेजा था, उसे भी दिल्ली पुलिस द्वारा तैयार किये गए आरोपपत्र में शामिल किया गया है।


Email में क्या कहा गया

बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप लगाया गया है कि उनके करीबियों ने पीड़ित महिला पहलवानों से संपर्क साधा था और पुलिस में दिए अपने बयान वापस लेने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की थी। 13 फरवरी 2023 को भेजे एक ईमेल में पीड़ित महिला पहलवान ने लिखा है- मैं गोपनीयता भंग किए जाने पर अपनी गंभीर चिंता जताते हुए यह लिख रही हूं, जो 9 फरवरी 2023 को जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम में हुआ।

जैसा कि आप जानते हैं कि हमें उस जगह यह कहकर बुलाया गया था कि गोपनीयता और प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा। कौन बयान देने आ रहा है, जो बयान देने आ रहा है, उसकी सुरक्षा होगी, उसकी जानकारी कहीं नहीं दी जाएगी। उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जायेगा।

लेकिन हम यह देखकर हैरान रह गए कि बृजभूषण के करीबियों जिनमें जय प्रकाश, महावीर बिश्नोई और दिलीप जैसे लोग शामिल हैं वो पूरे दिन कॉन्फ्रेंस रूम के आसपास मंडरा रहे थे। जबकि उसी समय बयान दर्ज किए जा रहे थे। इस कारण माहौल पूरी तरह से असहज हो गया था।


शिकायत में क्या कहा गया?

दिल्ली पुलिस को भेजे मेल में कहा गया की सिंह के करीबियों ने पीड़ित महिला पहलवानों से संपर्क किया और उनपर दबाव बनाने की कोशिश की जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है। जब बयान दर्ज किए जा रहे थे तो वे तीनों (जय प्रकाश, महावीर बिश्नोई और दिलीप) वहां क्यों घूम रहे थे? कानून के अनुसार उन्हें उस जगह नहीं होना चाहिए था। यह हमारी निजता का उल्लंघन है। अगर हममें से किसी के साथ कुछ भी गड़बड़ होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

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सिंह के खिलाफ नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न के नहीं मिले सबूत

कुश्ती संघ के पूर्व चीफ बृजभूषण शरण सिंह पर पहलवानों ने एक नाबालिग सहित सात महिला पहलवानों को डराने-धमकाने और यौन शोषण का आरोप लगाया था। काफी लंबे समय तक धरना देने के बाद दिल्ली पुलिस ने सिंह के खिलाफ दो मामले दर्ज किये थे, जिनमें एक मामला पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। बाद में जांच के बाद पुलिस को नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले और शिकायतकर्ता और उसके पिता बयान से भी पलट गए। इसी कारण पुलिस ने कोर्ट से पॉक्सो केस रद्द करने की मांग की थी।

अब तक इस मामले में क्या हुआ

सबसे पहले इसी साल 18 जनवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विनेश फोगाट, साक्षी मलिक के साथ बजरंग पूनिया ने धरना शुरू किया और रेसलिंग फेडरेशन के तत्कालीन चीफ बृजभूषण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन शोषण करने का आरोप लगाया।

तीन दिन बाद यानी 21 जनवरी को विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने पहलवानों से मुलाकात कर एक कमेटी गठित की, लेकिन कमेटी की रिपोर्ट में क्या पता चला ये सार्वजनिक नहीं हुई।

इसके बाद 23 अप्रैल को बड़ी संख्या में पहलवान फिर जंतर-मंतर पर धरने देने बैठ गए और मांग कि की बृजभूषण की गिरफ्तारी तक धरना जारी रहेगा इसके बाद 28 अप्रैल को पहलवानों की याचिका की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण पर छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट में 2 FIRदर्ज की।

फिर 3 मई की रात में पहलवानों और पुलिसकर्मियों के बीच जंतर-मंतर पर खूब झड़प हुई। इस झड़प के दो दिन बाद जंतर-मंतर पर हरियाणा, यूपी, राजस्थान और पंजाब की खापों की महापंचायत हुई। इसमें बृजभूषण की गिरफ्तारी के लिए केंद्र सरकार को 15 दिन की चेतवानी दी गई।

उसके बाद 26 मई को पहलवानों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि 28 मई को वे धरना स्थल से नए संसद भवन तक पैदल मार्च करेंगे। फिर 28 मई को पहलवानों ने नए संसद भवन के सामने महापंचायत के लिए जाने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

29 मई को पहलवानों ने जीते हुए मेडल को गंगा में बहाने का ऐलान किया। इसके बाद 30 मई को पहलवान हरिद्वार हर की पौड़ी में मेडल बहाने गए। जहां किसान नेता नरेश टिकैत के मनाने पर पहलवान मान गए और मेडल को नहीं बहाया।

इसके बाद दिल्ली पुलिस की जांच में 3 जून को इस मामले में 4 गवाह मिले हैं, जिन्होंने बृजभूषण पर लगे आरोपों की पुष्टि की है। फिर 4 जून को पहलवानों की गृह मंत्री अमित शाह से मीटिंग की। मीटिंग के बाद 5 जून को विनेश, साक्षी और बजरंग ने रेलवे में ड्यूटी जॉइन कर ली।

इस पूरे घटनाक्रम के दो सप्ताह बाद तीनों मुख्य पहलवानों ने ट्विट करके बताया की अब हम आगे की लड़ाई कोर्ट से लड़ेंगे तथा जबतक बृजभूषण की गिरफ्तारी नहीं होगी हम आवाज उठाते रहेंगे।

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