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राम मंदिर के लिए 11 करोड़ का दान देकर बटोरी सुर्खियां, अब भाजपा भेज रही राज्यसभा, कौन हैं गोविंद भाई ढोलकिया?

Govind Dholakia: गोविंद भाई ने बताया था कि वह भीषण गर्मी में 14 घंटे खेतों में काम करते थे। 1964 में जब पहली बार सूरत आए, तो हीरा पॉलिश का काम करने लगे। गोविंद भाई छठवीं क्लास तक पढ़े-लिखे हैं। वह 15 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़कर सूरत आ गए थे। उन्हें सूरत में रहकर कारोबार करते हुए दो अप्रैल को 60 साल पूरे हो जाएंगे।

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हीरा व्यवसायी गोविंद ढोलकिया BJP से जाएंगे राज्यसभा

हीरा व्यवसायी गोविंद ढोलकिया BJP से जाएंगे राज्यसभा

राम मंदिर के लिए दान देकर डायमंड का बिजनेस करने वाले गोविंद ढोलकिया ने सुर्खियां बटोरी थी। गुजरात के इस व्यवसायी ने राम मंदिर के लिए 11 करोड़ रुपये का चंदा दिया था। हीरा व्यवसायी गोविंद ढोलकिया को अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रही है। राज्यसभा के लिए नामांकित होने पर गोविंद ढोलकिया ने बताया कि मैं एक किसान परिवार से ताल्लुक रखता हूं। एक किसान से व्यवसायी बनने का मेरा सफर बहुत सुखद रहा है।

हीरा कारोबारी गोविंद भाई की कहानी

गोविंद भाई ढोलकिया सूरत से हैं। वह गुजरात की कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। गोविंद भाई ढोलकिया श्री राम कृष्ण एक्सपोर्ट (SRK) के नाम से डायमंड का कारोबार करते हैं। डायमंड कारोबारी गोविंद भाई ढोलकिया ने बताया कि उनका नाम राज्यसभा के लिए तय होने की जानकारी गृहमंत्री अमित शाह ने दी थी। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह राजनीति में या राज्यसभा में जाएंगे। अमित शाह ने उन्हें बताया था कि पीएम मोदी ने राज्यसभा भेजने के लिए उनका नाम तय किया है। गोविंद भाई छठवीं क्लास तक पढ़े-लिखे हैं। वह 15 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़कर सूरत आ गए थे। उन्हें सूरत में रहकर कारोबार करते हुए दो अप्रैल को 60 साल पूरे हो जाएंगे।

कौन हैं हीरा कारोबारी गोविंद ढोलकिया?

गोविंद भाई ने कहा कि मुझे केवल चार घंटे पहले ही अपने नामांकन के बारे में पता चला था। भाजपा नेतृत्व ने मेरा नाम तय करने से पहले विचार किया होगा। गोविंद भाई ढोलकिया श्रीरामकृष्ण एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (एसआरके) के संस्थापक और निदेशक हैं। उनका पूरा नाम गोविंद लालजीभाई ढोलकिया है। बिजनेस की दुनिया के लोग उन्हें जीएलडी कहते हैं। साथ ही घर में गोविंद काका के नाम से बुलाया जाता है।

कैसे बने हीरा कारोबारी

गोविंद भाई ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह भीषण गर्मी में 14 घंटे खेतों में काम करते थे। 1964 में जब पहली बार सूरत आए, तो हीरा पॉलिश का काम करने लगे। हीरा पॉलिश करने के दौरान 28फीदसी खुरदरे पत्थर को चमकदार हीरे में बदला जाता था। बाकी कचरा हो जाता था। मेहनत से काम करते हुए ढोलकिया ने 28 की जगह 34 प्रतिशत पत्थर को बचा लिया। जिसकी कीमत बहुत थी। गोविंद भाई ने बताया था कि मेरे काम से खुश होने की बजाय मालिक ने मुझसे कहा कि जो कचरा बचा है, इसे काट-छांटकर छोटे-छोटे हीरे तैयार करो। मैंने मना कर दिया। इस दौरान मुझे एहसास हुआ कि अगर मैं पत्थर से 6 प्रतिशत ज्यादा हीरे तैयार कर सकता हूं, तो फिर मुझे अपना खुद का बिजनेस शुरू कर सकता हूं। इसके बाद 1970 में दो साझीदारों के साथ श्री रामकृष्ण (एसआरके) एक्सपोर्ट्स की शुरुआत की।
बता दें कि सूरत के बीच में स्थित कतारगाम को वैश्विक डायमंड पॉलिशिंग हब के रूप में जाना जाता है। कतारगाम में स्थित 6 मंजिला 'एसआरके एम्पायर’ और SRK के मुख्यालय के रूप में इसके पास ही 9 मंजिला SRK हाउस हैं। तीन दशक पहले सूरत को हीरा पॉलिशिंग के वैश्विक मानचित्र पर लाने का श्रेय एसआरके को ही जाता है।
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