
घोसी उपचुनाव को जीतने के लिए अखिलेश यादव ने जहां अपने चाचा शिवपाल को तो भाजपा ने अपनी पूरे मंत्रीपरिषद को एक तरह से मैदान में उतार दिया था। लेकिन अखिलेश के PDA के नारे के सामने बाबा का बुलडोजर नहीं चल पाया और कई दलों की सवारी कर चुके दारा को हार का सामना करना पड़ा है। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि दारा के साथ पूरी भाजपा के खड़े होने के बूावजूद भी दारा घोसी का दंगल क्यों हार गए?
दारा पर लगा दलबदलू होने का टैग
इस उपचुनाव में BJP प्रत्याशी दारा सिंह चौहान उसी सीट से हार गए, जहां पर वो 2022 में विधानसभा चुनाव जीते थे। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उनका ऊपर दलबदलू होने का आरोप लगना था। इसके साथ ही दारा सिंह चौहान के खिलाफ वोटिंग पैटर्न घोसी में देखा गया। चौहान, निषाद और राजभर बूथों पर सपा को वोट मिले। बार बार दल बदलने से घोसी के लोगों में दारा के खिलाफ नाराजगी थी।
घोसी की जनता को समझ नहीं पाए BJP के शिल्पी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, संगठन मंत्री,दो दर्जन,मंत्री,6 दर्जन विधायकों और दर्जनों संगठन शिल्पियों (बड़े ,छोटे,मझले)ने घोसी की चौहद्दी घेर दी थी लेकिन जनता को समझाने में नाकाम रहे। रही सही कसर भाजपा के सहयोगी दलों ने पूरी कर दी थी, उनका साफ़ कहना था कि सवर्ण वोटों की कोई ज़रूरत नहीं है,और भाजपा के सवर्ण वोट देने के लिए निकले नहीं। वहीं, दूसरी तरफ भाजपा के नेता घोसी में - गमछा बंटेगा की नहीं,कितना बंटेगा,इस पर घंटों बैठक करते थे आखिर में गमछा भी नहीं बंट पाया।
Published on:
08 Sept 2023 09:54 pm
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