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महिला आरक्षण बिल के समर्थन में आए सीएम नीतीश कुमार, बोले- हम शुरू से ही रहे हिमायती… अगर ये भी होता तो

Nitish Kumar On Women Reservation Bill: आज नए संसद भवन में विशेष सत्र के दूसरे दिन केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश किया। बिल पेश होने के बाद सभी राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया सामने आई। अब बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने इस बिल का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर इसे स्वागत योग्य कदम बताया है।  

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Nitish Kumar On Women Reservation Bill: आज संसद के विशेष सत्र का दूसरा दिन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। आज सदन की कार्यवाही नई बिल्डिंग में शुरू हुई। इसी दौरान प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि सरकार महिला आरक्षण बिल ला रही है। जिसका नाम 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' रखा गया है। इसके बाद केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसे लोकसभा में पेश किया। दोनों सदनों से पारित होने के बाद जब यह बिल कानून बनेगी, उसके बाद लोकसभा में महिला सांसदों के लिए 181 सीट आरक्षित हो जाएगी। इस बिल पर लगभग सभी पार्टियों में अपना समर्थन जाहिर किया। बिहार के सीएम नीतीश कुमार, जो पहले NDA के साथी थे। उन्होंने भी इस बिल को स्वागत योग्य कदम बताया है।


नीतीश कुमार ने क्या कहा
संसद में जो महिला आरक्षण बिल लाया गया है, वह स्वागत योग्य कदम है।
हम शुरू से ही महिला सशक्तीकरण के हिमायती रहे हैं और बिहार में हमलोगों ने कई ऐतिहासिक कदम उठाये हैं।
वर्ष 2006 से हमने पंचायती राज संस्थाओं और वर्ष 2007 से नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया।
वर्ष 2006 से ही प्रारंभिक शिक्षक नियोजन में महिलाओं को 50 प्रतिशत और वर्ष 2016 से सभी सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है।
वर्ष 2013 से बिहार पुलिस में भी महिलाओं कोे 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। आज बिहार पुलिस में महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी देश में सर्वाधिक है।
बिहार में मेडिकल एवं इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के अन्तर्गत नामांकन में न्यूनतम 33 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिये आरक्षित की गयी हैं। ऐसा करनेवाला बिहार देश का पहला राज्य है।
हमलोगों ने वर्ष 2006 में राज्य में महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन के लिए परियोजना शुरू की जिसका नामकरण ‘‘जीविका‘‘ किया।
बाद में तत्कालीन केन्द्र सरकार द्वारा इसकी तर्ज पर महिलाओं के लिए आजीविका कार्यक्रम चलाया गया।
बिहार में अब तक 10 लाख 47 हजार स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है जिसमें 1 करोड़ 30 लाख से भी अधिक महिलाएँ जुड़कर जीविका दीदियाँ बन गयी हैं।
हमारा मानना है कि संसद में महिला आरक्षण के दायरे में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की तरह पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिये भी आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिये।
प्रस्तावित बिल में यह कहा गया है कि पहले जनगणना होगी तथा उसके पश्चात निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन होगा तथा इसके बाद ही इस प्रस्तावित बिल के प्रावधान लागू होंगे। इसके लिए जनगणना का काम शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए। जनगणना तो वर्ष 2021 में ही हो जानी चाहिए थी परन्तु यह अभी तक नही हो सकी है। जनगणना के साथ जातिगत जनगणना भी करानी चाहिए तभी इसका सही फायदा महिलाओं को मिलेगा। यदि जातिगत जनगणना हुई होती तो पिछड़े एवं अतिपिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था को तुरंत लागू किया जा सकता था।