
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (फोटो- आईएएनएस)
संसद में महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं होने के बाद विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। पीएम मोदी ने शनिवार शाम इस मामले को लेकर एक राष्ट्र संबोधन किया था और इस दौरान उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर जमकर हमला बोला। अब पीएम के इस संबोधन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रतिक्रिया सामने आई है। खरगे ने पीएम मोदी के भाषण पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वास्तविक शासन मुद्दों की बजाय विपक्ष, खासकर कांग्रेस, को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सरकार की नीयत और प्राथमिकता स्पष्ट नहीं दिखती है। खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस का बार-बार जिक्र किया, लेकिन महिलाओं के मुद्दों को अपेक्षित महत्व नहीं दिया। उनके अनुसार यह दिखाता है कि सरकार की प्राथमिकताओं में महिलाओं का सशक्तिकरण शीर्ष पर नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है और उसने पहले भी इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
खरगे ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने वर्ष 2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया था ताकि यह लंबित न रहे। इसके अलावा, उन्होंने सरकार से मांग की कि 2023 में पारित कानून को बिना देरी के लागू किया जाए और लोकसभा की मौजूदा सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। खरगे ने अपने बयान में कहा कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट पहले से लागू है और यह साफ है कि पीएम मोदी ने आधिकारिक मशीनरी का दुरुपयोग कर विपक्ष पर हमला किया। यह लोकतंत्र और भारत के संविधान की अवहेलना है।
खरगे ने आगे कहा कि पीएम मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस का 59 बार जिक्र किया और महिलाओं का बहुत कम। इससे देश को उनकी प्राथमिकताओं का पता चलता है। खरगे ने कहा कि भाजपा की प्राथमिकता महिलाएं नहीं बल्कि कांग्रेस है क्योंकि कांग्रेस इतिहास के सही पक्ष में खड़ी है। उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह अलग-अलग विधायी मुद्दों को मिलाकर भ्रम पैदा कर रही है। उनके अनुसार महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है और इसे स्वतंत्र रूप से लागू किया जाना चाहिए।
खरगे ने सरकार की आर्थिक नीतियों और मौजूदा परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश महंगाई, आर्थिक मंदी और वैश्विक संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री ने इन मुद्दों पर ठोस समाधान प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने अपने बयान में कहा, 12 साल से ज्यादा सत्ता में रहने के बाद, अंतरराष्ट्रीय संकट, बढ़ती महंगाई, गिरती अर्थव्यवस्था और जनता की परेशानियों के बीच प्रधानमंत्री के पास देश को देने के लिए केवल एक राजनीतिक भाषण था। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे देश की एकता प्रभावित हो रही है।
Updated on:
19 Apr 2026 11:05 am
Published on:
19 Apr 2026 11:04 am
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