
लैंसकार्ट हिजाब विवाद (फोटो- Shiva Thakur एक्स पोस्ट)
TCS Nasik Case: नासिक की TCS कंपनी महिलाओं के यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण का मुद्दा सामने आने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद में कई अन्य कंपनियों के नाम भी जुड़े जिनमें से एक प्रमुख आईवियर कंपनी लेंसकार्ट भी है। लैंसकार्ट पर कर्मचारियों की आस्था से जुड़े प्रतीकों पर प्रतिबंध लगाने का आरोप लगा था जिसके बाद अब कंपनी ने नई स्टाइल गाइड जारी कर दी है। इसमें जिसमें सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को स्पष्ट रूप से अनुमति दी गई है। यह बदलाव उस विवाद के बाद आया है, जिसमें कंपनी की पुरानी गाइडलाइन को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।
TCS केस सामने आने के बाद लेंसकार्ट की एक पूरानी स्टाइल गाइड सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी थी जिसमें स्टोर कर्मचारियों के लिए बिंदी, तिलक और धार्मिक धागों जैसे कलावा पर प्रतिबंध बताया गया था, जबकि हिजाब और पगड़ी की अनुमति थी। इस असमानता को लेकर सोशल मीडिया पर धार्मिक भेदभाव के आरोप लगे। लोगों ने इसे एकतरफा नीति बताते हुए आलोचना की। विवाद बढ़ने पर कंपनी के फाउंडर और सीईओ पियूष बंसल ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि यह पुराना डॉक्यूमेंट है और वर्तमान नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता। उन्होंने इस कन्फ्यूजन के लिए खेद जताया और स्पष्ट किया कि कंपनी किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति पर रोक नहीं लगाती।
इस विवाद के बाद अब शुक्रवार को लेंसकार्ट ने अपनी नई और अपडेटेड स्टाइल गाइड जारी की और उसे सोशल मीडिया पर सार्वजनिक भी किया। कंपनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, हमने आपकी बात सुनी है, यह गाइडलाइन हर उस प्रतीक का स्वागत करती है जो हमारी टीम के सदस्य अपने साथ लाते हैं। नई गाइडलाइन के अनुसार अब बिंदी, तिलक, सिंदूर जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक चिन्हों को अनुमति दी गई है। इसके साथ ही कलावा, कड़ा, मंगलसूत्र, चूड़ियां जैसे धार्मिक वस्त्र और आभूषण भी स्वीकार्य हैं। हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी। कंपनी ने यह भी दोहराया कि उसका उद्देश्य कर्मचारियों की पहचान और आस्था का सम्मान करना है, न कि उसे सीमित करना।
हालांकि नई गाइडलाइन जारी होने के बाद भी सोशल मीडिया पर मिली-झुली प्रतिक्रियाएं ही सामने आ रही है। कुछ लोगों ने इसे सही कदम बताया, लेकिन कई यूजर्स ने कंपनी की माफी को अपर्याप्त बताया। एक यूजर ने लिखा कि सीधी और स्पष्ट माफी की कमी है, केवल सुधार की बात की जा रही है। वहीं दूसरे ने सवाल उठाया कि शुरुआत में ऐसी पॉलिसी क्यों बनाई गई थी। लेंसकार्ट ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी को ठेस पहुंची है तो उसे खेद है और कंपनी अपने भारतीय मूल्यों पर कायम रहेगी, जहां विविधता और पहचान का सम्मान किया जाता है।
Published on:
19 Apr 2026 08:53 am
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