
टीएमसी के बागी सांसद (फोटो- Nabila Jamal एक्स पोस्ट)
TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी संकट अब पार्टी के बंटवारे तक पहुंच गया है। पहले से ही सांसदों की बगावत का सामना कर रही ममता बनर्जी पर अब एक और बड़ी आफत आ गई है। ममता के बागी सांसद अब उनके हाथों से उन्हीं की पार्टी हथियाने की कोशिश कर रहे है। खबरों के अनुसार बागी गुट सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर के खुद को असली TMC का टैग देने की मांग करेंगे। बागी सांसदों का उद्देश्य संसद में TMC के तौर पर आधिकारिक मान्यता मांगने का है। अगर लोकसभा स्पीकर सांसदों की यह मांग मान लेते है तो यह ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है।
बागी गुट में शामिल सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने शुक्रवार को मीडिया बातचीत के दौरान यह दावा किया है। उनके अनुसार पार्टी के 19 लोकसभा सांसद उनके गुट का समर्थन कर रहे है और अब वह लोकसभा स्पीकर से असली टीएमसी होने की मान्यता देने की मांग करेंगे। बता दें कि विधानसभा चुनावों में हार के बाद से टीएमसी में बगावत का दौर शुरू हो गया। बागी सांसदों का दावा है कि पार्टी में लोकतांत्रिक माहौल खत्म हो गया है और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है। सांसद काकोली घोष दस्तिदार पहले ही सभी पार्टी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं और उन्होंने दावा किया था कि करीब 20 सांसद असंतुष्ट गुट के साथ हैं। इस गुट में सायोनी घोष, माला रॉय, यूसुफ पठान और शताब्दी रॉय जैसे कई चर्चित चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं। बागी सांसदों का कहना है कि वे लोकसभा में अलग पहचान और संगठनात्मक वैधता चाहते हैं।
संकट उस समय और गहरा गया जब वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से अभिषेक बनर्जी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अभिषेक के अहंकार की वजह से पार्टी मुश्किल दौर में पहुंची है। कल्याण बनर्जी ने यह भी ऐलान किया कि वह अब अभिषेक बनर्जी से जुड़े किसी कानूनी मामले में पेश नहीं होंगे। उन्होंने ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि उन्हें अभिषेक या उनमें से किसी एक को चुनना होगा। यह बयान उस समय आया जब अभिषेक बनर्जी कोलकाता में हस्ताक्षर फर्जीवाडा मामले में जांच एजेंसियों के सामने पेश हुए थे। इस विवाद ने पार्टी के अंदर की खींचतान को और उजागर कर दिया है।
बता दें कि, टीएमसी पर आया यह राजनीतिक संकट केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है। सांसदों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा में 58 बागी विधायकों के समूह ने भी पार्टी से बगावत करते हुए प्रमुख विपक्षी गुट के रूप में मान्या हासिल कर ली है। इसके अलावा राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफों ने भी पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाया है। इसी बीच कांग्रेस के साथ संभावित करीबी को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि कांग्रेस ने किसी विलय की संभावना से इनकार किया है। दूसरी ओर ममता बनर्जी खेमे ने बागी नेताओं को अवसरवादी बताते हुए उन पर राजनीतिक नैतिकता की कमी का आरोप लगाया है। पार्टी में जारी यह सकंट जल्द थमता नजर नहीं आ रहा है।
Updated on:
12 Jun 2026 05:08 pm
Published on:
12 Jun 2026 04:25 pm
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