
सरकार ने डीजल की कालाबाज़ारी के खिलाफ ऑर्डर जारी किया (प्रतीकात्मक तस्वीर)
देश में डीजल की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नया अस्थायी नियंत्रण आदेश लागू किया है। पिछले कुछ महीनों में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के रिटेल आउटलेट्स पर डीजल की मांग अचानक तेजी से बढ़ी थी, जिसके चलते सरकार ने यह नए नियंत्रण आदेश जारी किए है। इसके तहत अब रिटेल आउटलेट्स से प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल ही खरीदा जा सकेगा। यह आदेश शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेगा और इसका उद्देश्य बल्क उपभोक्ताओं द्वारा सस्ते रिटेल डीजल के दुरुपयोग को रोकना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला आम उपभोक्ताओं को राहत देने और रिटेल पंपों पर निर्बाध सप्लाई बनाए रखने के लिए लिया गया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मोटर स्पिरिट एंड हाई स्पीड डीजल (टेम्पररी रेगुलेशन ऑफ सप्लाई थ्रू रिटेल आउटलेट्स) ऑर्डर, 2026 अधिसूचित किया है। इसके तहत भारतीय तेल निगम लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अब डीजल केवल वाहन टैंक या पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) द्वारा अनुमति दिए गए कंटेनरों में ही दिया जाएगा। किसी भी ग्राहक या वाहन को प्रतिदिन 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा। साथ ही रिटेल आउटलेट से खरीदे गए डीजल की दोबारा बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
सरकार के अनुसार औद्योगिक और कमर्शियल उपभोक्ता पिछले कुछ समय से बल्क डीजल की तुलना में सस्ता रिटेल डीजल खरीद रहे थे। रिटेल और बल्क कीमतों में लगभग 40 रुपये प्रति लीटर का अंतर होने के कारण कई कंपनियां अपने निर्धारित कंज्यूमर पंप छोड़कर सार्वजनिक रिटेल आउटलेट्स से खरीद कर रही थी। मई 2026 के आंकड़ों में 327 जिलों में डीजल बिक्री 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ी, जबकि 80 जिलों में यह वृद्धि 30 प्रतिशत से ज्यादा रही। निजी तेल विपणन कंपनियों की बिक्री में भी करीब 58 प्रतिशत गिरावट दर्ज हुई। सरकार को जरी कैन में डीजल खरीदकर उसकी अवैध बिक्री के कई मामले भी मिले थे।
सरकार ने कहा है कि देश में पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है और यह कदम केवल अस्थायी नियंत्रण के लिए उठाया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां फिलहाल पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी पर प्रतिदिन लगभग 500 करोड रुपये का भार उठा रही हैं ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कालाबाजारी और अनधिकृत डाइवर्जन रोकने के लिए कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई होगी।
Updated on:
12 Jun 2026 04:03 pm
Published on:
12 Jun 2026 03:46 pm
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