
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Photo-IANS)
Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की सियासत बीते 5 दशकों से रक्तरंजित रहा है। राजनीतिक पार्टियों के नेताओं पर हमले की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ऐसा ही हमला साल 1990 में ममता बनर्जी के ऊपर हुआ था। जिसमें वह बुरी तरह चोटिल हो गई थी। उनके करीबी बचने की आस तक छोड़ चुके थे।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का सूर्य साल 1977 इमरजेंसी के खत्म होते ही डूब चुका था। राज्य में सिद्धार्थ शंकर रे की कांग्रेस की सरकार जा चुकी थी। बंगाल की सत्ता से लेकर सड़कों पर लाल झंडा का राज था। कॉमरेड ज्योति बसु के नेतृत्व वाममोर्चा की सरकार थी। उस दौर में कोलकाता में ज्योति बसु का सिक्का चलता था। बसु के नेतृत्व में वाममोर्चा लगातार राज्य में चुनकर आ रही थी। इस दौरान कांग्रेस में एक महिला युवा नेता ममता बनर्जी तेजी से उभर रही थी।
साल 1990 में ममता युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। ज्योति बसु की सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने 16 अगस्त 1990 को बंद का आह्वान किया था। दक्षिण कोलकाता में कालीघाट में ममता बनर्जी अपने घर के पास में हाजरा में कांग्रेस की रैली का नेतृत्व कर रही थी। कोलकाता की सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। दुकानें बंद थी। इक्का दुक्का गाड़ियां चल रही थी।
रैली जैसे ही हजरा-सुभाष चंद्र मुखर्जी रोड क्रॉसिंग के पास पहुंची ही थी कि CPM के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की रैली पर हमला बोल दिया। हमलावर लाठियां, लोहे की रॉड्स और अन्य हथियारों लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर टूट पड़े। ममता रैली का नेतृत्व कर रही थीं, इसलिए सबसे क्रूर हमला ममता बनर्जी पर हुआ। इस हमले में ममता का सिर फट गया और वह साड़ी से सिर ढक कर सड़क पर ही बैठ गईं। उनकी साड़ी खून से पूरी तरह लाल हो चुकी थी। उनके कलाई और हाथों पर भी चोट आया था।
घायल ममता को तुरंत एसएसकेएम अस्पातल में भर्ती कराया गया। जहां न्यूरोसर्जी विभाग में उनका इलाज शुरू हुआ। डॉक्टरों ने कहा कि ममता के सिर पर गंभीर चोट आई है। खून का बहाव भी तेज था। यह बात जब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व PM राजीव गांधी को पता चली तो उन्होंने ममता को जल्द से जल्द प्राइवेट अस्पताल वुडलैंड्स नर्सिंग होम में शिफ्ट कर दिया गया। इलाज में सर्जरी हुई, 16 स्टिच लगे और वे एक महीने से ज्यादा (करीब 30-35 दिन) अस्पताल में रहीं।
इस हमले को लेकर तृणमूल सांसद और ममता बनर्जी के करीबी सौगत रॉय ने बीबीसी से बात करते हुए कहा था कि हमने तो मान लिया था कि अब ममता का बचना मुश्किल है, लेकिन जीने और बंगाल के लोगों के लिए कुछ बेहतर करने की अदम्य ललक ने ही उनको बचाया था। उन्होंने कहा कि हजरा 1990 बंगाल की राजनीतिक यादों में जिंदा है। एक ऐसी घटना जो एक योद्धा को जन्म दे गई।
Published on:
08 Feb 2026 01:19 pm
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