नीमच. आज देश में बच्चों के साथ दिन-प्रतिदिन घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। साथ ही बच्चे भी नासमझी के कारण इस प्रकार के कृत्य कर देते हैं कि उनको आजीवन उस घटना का दु:ख रहता है। चाइल्ड लाईन हेल्पलाईन नम्बर 1098 के माध्यम से पिछले 7 सालों में 5 हजार 222 बच्चों की मदद की जा चुकी है।
वर्ष 2016 से संस्था सहज समाज उत्थान समिति नीमच भी चाइल्ड लाईन प्रोजेक्ट का संचालन कर रही है। कैप्टन रामचन्द्र बोरिवाल के निर्देशन में चाइल्ड लाईन टीम बच्चो के लिए दिन-रात निरंतर उत्कृष्ट कार्य करती आ रही है। वर्ष 2016 से अगस्त 2023 तक संस्था देखभाल और संरक्षण वाले 5 हजार 222 बच्चों की मदद अब तक कर चुकी है। चाइल्ड लाईन 18 प्रकार की केस केटेगिरी में कार्य करती है जिसकी कुछ मुख्य केटेगिरी बाल यौन शोषण रोकथाम में 50 बच्चों की मदद की गई। बालश्रम रोकथाम में 111 बच्चे, बाल विवाह रोकथाम में 125 बच्चे, शारीरिक शोषण रोकथाम में 143 बच्चे, मानसिक शोषण रोकथाम में 295 बच्चे, भिक्षावृत्ति रोकथाम में 272 बच्चे, गुमशुदा 302 बच्चे, घरेलु हिंसा रोकथाम में 125 बच्चों की मदद की अब तक चाइल्ड लाईन मदद कर चुका है। इसके अतिरिक्त भी अन्य कई मामलों में चाइल्ड लाईन नीमच निरंतर बच्चों की मदद की जा रही थी। चाइल्डलाईन नीमच के उत्कृष्ट कार्यों के अंतर्गत एक 16 वर्षीय गुमशुदा बालिका जो सीतापुर उत्तरप्रदेश से लगभग एक हजार किलोमीटर दूर अकेले ट्रेन में नीमच आ गई थी। चाइल्ड लाईन नीमच ने जीआरपी पुलिस नीमच की मदद से बालिका को आश्रयगृह में रखवाया। तत्काल बालिका के लिए 1098 मुबंई से सम्पर्क कर संबंधित जिला सीतापुर उप्र की चाइल्डलाईन टीम से सम्पर्क कर बालिका के घर का पता लगाकर बालिका को परिजनो से मिलवाया था। 12 वर्ष से छोटी दो बालिकाओं के साथ होने वाले यौन शौषण के मामलों में चाइल्ड लाईन नीमच ने एफआईआर दर्ज करवाकर आवश्यकतानुसार कार्रवाई की। इसके अंतर्गत ३ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई। इसके अलावा भी पॉक्सो एक्ट में भी २ अन्य आरोपियों को तिहरे आजीवन कारावास की सजा हुई। ५ आरोपियों को बाल यौन शौषण के मामलों में आजीवन कारावास की सजा हुई है।