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करोड़ों के घोटाले के आरोप सिद्ध, जानिए किन दोषियों पर होगी कार्रवाई

जिला पंचायत सदस्य ने की थी शिकायत, भारी अनियमितता की जांच में हुई पुष्टि, कलेक्टर ने दोषियों को हटाने के निर्देश दिए

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नीमच. भूमिगत जल को संरक्षित करने की बहुउद्देश्यीय योजना वॉटर शेड मिशन में करोड़ों के घोटाले के आरोप जांच रिपोर्ट में सिद्ध हुए हैं। इस मामले में जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस नेत्री मधु बंसल ने शिकायत राजधानी से लगाकर प्रधानमंत्री तक को की थी। इस घोटोले में वॉटर शेड मिशन के तकनीकी अधिकारी सहित वॉटर शेड समितियों के अध्यक्ष और सचिवों को भी विभिन्न मामलों में दोषी माना गया है। इधर कलेक्टर ने इस प्रकरण के प्रकाश में आते ही दोषियों को जिम्मेदार पदों से हटाने के निर्देश जिला पंचायत सीईओ को दिए हैं। इसके अलावा कार्रवाई के संबंध में जांच प्रतिवेदन शासन को भी भेजा है।

जिला पंचायत सदस्य एवं कांग्रेस की नेता मधु बंसल ने बताया कि वॉटर शेड मिशन में वर्ष 2015 से अब तक 10 विभिन्न परियोजनाओं पर करीब 25 करोड़ रुपए की राशि व्यय की, जबकि इसकी आधी राशि का भी सदुपयोग नहीं किया। कार्यालयीन, वाटरशेड विकास कार्य, प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, आस्था मूलक कार्य, कृषि उत्पादकता विकास आदि मदों में भारी अनियमितताओं की शिकायत प्रधानमंत्री, ग्रामीण विकास विभाग नई दिल्ली, लोकायुक्त, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और कमिश्नर उज्जैन को की थी। इसमें तकनीकी विशेषज्ञ विनिता शर्मा, टीम लीडर, संबंधित समितियों के अध्यक्ष सचिवों आदि के द्वारा गंभीर अनियमितताएं की थी।

शिकायत पर पूर्व जांच अधिकारियों द्वारा लीपापोती की गई, तब पुन: शिकायत के बाद राज्य शासन के निर्देश पर कलेक्टर द्वारा वरिष्ठ लेखाधिकारी से जांच करवाई, जिसमें माना गया कि वॉटर शेड के कार्यों में करोड़ों रुपए की अनियमितताएं हुई हैं। सूचना के अधिकार के तहत जांच रिपोर्ट संबंधी दस्तावेज ले लिए हैं। हालांकि जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद भी तकनीकी अधिकारी विनिता शर्मा आज दिनांक तक पद पर बनी हुई हैं और कार्य कर रही हैं। यही नहीं अब तक मामले में एफआईआर भी तक दर्ज नहीं कराई गई है।

इस तरह हुई थी गड़बडिय़ां
जांच रिपोर्ट के मुताबिक टीम लीडर द्वारा परियोजना क्रमांक 6 में सामग्री क्रय समिति की दिनांक में काटछांट की इर्ग, देयक भुगतान की स्वीकृति के समय स्टॉक पंजी का पृष्ठ क्रमांक देयक पर अंकित ही नहीं किया गया। भंडार कृय नियम का उल्लंघन करते हुए तकनीकी विशेषज्ञ एवं टीम लीडर द्वारा सीधे भुगतान कर दिया गया। इसमें 67 हजार 122 रुपए की अनियमितता हुई। इसी तरह 400 लंच पैकेट 300 रुपए प्रति पैकेट के मान से 1 लाख 20 हजार रुपए का भुगतान होटल जिंदल को किया गया, जबकि बिल, टिन नंबर, बुक नंबर अंकित ही नहीं हैं। तकनीकी अधिकारी और टीम लीडर द्वारा शासकीय कार्य एवं परियोजना कार्य से भ्रमण के लिए ट्रेवल एजेंसियों को लाखों रुपए के फर्जी भुगतान किए गए। शासकीय अधिकारियों के भ्रमण पर भी कहीं 30 हजार रुपए तो कहीं 43 हजार रुपए का भुगतान दर्शाया गया है। कोज्या, रुपपुरा, रुपपुरिया, परिछा आदि स्टॉप डेम निर्माण के लिए तकनीकी स्वीकृति में मुख्यालय के निर्देशों का सीधे तौर पर उल्लंघन किया।

अधिकांश कार्यों में फर्जी बिल लगाए गए और जेसीबी आदि के भुगतान में भी लाखों रुपए की गड़बडिय़ां हैं। यहां तक कि बिलों और भुगतान प्राप्ति तक पर फर्जी हस्ताक्षर हैं। न तो भुगतान पूर्व देयकों का सत्यापन कराया गया और न ही भंडार क्रय नियमों का पालन किया गया। जांच में माना गया है कि मस्टर रोल भी फर्जी बनाकर भुगतान किया गया। यह गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है। जिला पंचायत सदस्य बंसल ने कहा कि वॉटर शेड के नाम पर पूरी तरह मिलीभगत से सरकारी राशि के वारे न्यारे किए गए हैं। इसमें भी जिम्मेदारों को बचाने का काम हो रहा है। जबकि अब तक एफआईआर दर्ज कराकर दोषियों को पदों से हटा दिया जाना था।

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