
नीमच में डेढ साल में साइबर ठगो ने ठगे करीब 1 करोड़ 63 लाख 49 हजार 759 रुपए
नीमच। नीमच जिले में गत डेढ वर्ष में करीब 386 शिकायत साइबर क्राइम के तहत ठगी की दर्ज हुई है। जिनमें करीब 1 करोड़ 63 लाख 49 हजार 759 रुपए का फ्राड हुआ है। जिसमें से तत्परता के चलते शिकायत पर करीब 29 लाख 56 हजार 441 रुपए साइबर सेल के माध्यम से लोगों पुन: प्राप्त किए गए है। हैकर्स भी अब एडवांस्ड हो गए हैं। लोगों को अपने झांसे में लेकर उनकी मेहनत की कमाई पर मिनटों में हाथ साफ कर देते हैं। अगर आपके साथ कभी ऐसा हो जाएं तो घबराएं नहीं बल्कि तुरंत भारत सरकार द्वारा जारी किया ये नंबर 155260 पर डायल करें या फिर तुरंत संबंधित थाने अथवा साइबर सेल को सूचित करें। ई-केवाईसी घोटालों और अन्य संबंधित धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं के साथ, जहां नागरिकों को यूपीआई के माध्यम से पैसा गंवाना पड़ रहा है, पुलिस के साइबर अपराध विभाग ने कहा कि लोग 155260 पर कॉल करके इस तरह की धोखाधड़ी की रिपोर्ट कर सकते हैं।
जिले में साइबर ठगी का ग्राफ
वर्ष शिकायते ठगी पुन: प्राप्त किया रुपया फ्रीज खाते
२०२१ २४९ ९५२०३३१ रु. २७७५२९२ रु. २४५७५४३३
२०२२ १३७ ६८२९४२८ १८११४९ ४४४८८९ (जुलाई माह तक आंकड़े)
जिले में फोन पर साइबर ठगी का तरीका
- नीमच में दस प्रतिशत मामले में विद्युत बिल के नाम से ठगी के आते है। विद्युत विभाग के नाम से अनजान मोबाइल नंबरों द्वारा बिजली बिल बकाया होने का मैसेज भेजा जाता है। जिसमे बकाया बताकर कनेक्शन काटने का भय दिया जाता है। जिस पर एक विद्युत अधिकारी का फोन नंबर लिखा होता है, जो कि ठग का होता है। कॉल करने पर वह रिसीव करता है।ऑनलाइन बिल जमा करने का सुझाव देता है।एक एप्लीकेशन अपने मोबाइल में इंस्टाल करने को कहता है। जो कि वास्तव में एक रिमोट एक्सेस एप या स्क्रीन शेयरिंग एप होता है। जैसे कि एनीडेस्क, क्विक सपोर्ट, टीम ब्यूअर की तरह होता है। जिसके आधार पर मोबाइल हैक कर एकाउंट से रुपए ट्रांसर्फर कर लेते है।
- वाट्सएप वीडियो कॉल पर ब्लेकमेल के करीब २० प्रतिशत मामले जिले में आ रहे है। इसमें महिला फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर जुड़ जाती है। वह धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ाकर अश£ील बाते करने लग जाती है। उसके बाद वस्त्र उतारने को कहती है। जिसकी रिकॉर्डिंग कर ब्लेकमेल करना शुरू कर दिया जाता है।
- केवाईसी अपडेट के नाम पर १० प्रतिशत जिले में ठगी के मामले आते है। जिसमें सायबर अपराधी द्वारा कॉल तथा मैसेज करके सिम केवाईसी, बैंक केवाईसी अपडेट करने के नाम पर खुद संबंधित बैंक कर्मचारी बताते हुए आपका बैंक खाता, सिम कार्ड लॉक हो गया है। कार्डनंबर सीवीवी, ओटीपी आदि पूछकर ठगी को अंजाम देते है।
- जिले में सोशल मीडिया, फेक वेबसाइट, ओएलएक्स पर ठगी के करीब ३० प्रतिशत मामले आते है। इसमें वास्तविक मूल्य से कम मूल्य पर वस्तु बेचने का प्रलोभन देकर ठगी की जा रही है। लालच देकर लोगों को झांसे लेकर कोरियर फीस, जीपीएस चार्ज, डिलीवरी चार्ज के नाम पर राशि जमा करा लेते है।
- फेक लोन एप द्वारा ठगी के भी करीब ३० प्रतिशत मामले जिले में आते है। कुछ फेक लोन एप द्वारा आम नागरिको को आसानी से एवं पेपरलेस लोन प्रदाय किया जा रहा है। उक्त फेक एप के माध्यम से संबंधित नागरिक की मोबाइल की पूरी जानकारी जैस संपर्क सूची आदि जानकारी प्रात कर लेते है। नागरिक द्वारा समयावधि में लोन जमा करने के उपरांत भी लोन से अधिक राशि जमा करने के लिए दबाव बनाया जाता है। राशि जमा नहीं करने पर संपर्क सूची से परिचितो को भी मैसेज भेजे जाते हैं।
इन राज्यों में हो रहा है इस्तेमाल
यह हेल्पलाइन नंबर सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग और मैनेजमेंट सिस्टम का हिस्सा है जिसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों और बैंकों और वित्तीय मध्यस्थों को एकीकृत करने के लिए आंतरिक रूप से विकसित किया गया है। वर्तमान में इसका उपयोग सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (छत्तीसगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश) द्वारा 155260 के साथ किया जा रहा है।
हेल्पलाइन नंबर में शामिल हैं ये प्रमुख बैंक
गृह मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, इस हेल्पलाइन नंबर में सभी प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक शामिल हैं। जिसमें - स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, इंडसइंड, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस, यस और कोटक महिंद्रा बैंक शामिल हैं। इसमें सभी प्रमुख वॉलेट और मर्चेंट्स जैसे- पे-टीएम, फोन-पे, मोबिकविक, फिल्पकार्ट और एमेजोन इससे जुड़े हुए हैं।
कभी भी संदेह होने पर तुरंत को पुलिस को सूचना दे
ऑनलाइन बैकिंग में अधिक साइबर ठगी की संभावना अधिक रहती है। हमे जरूरत होने पर ऑनलाइन बैकिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं कभी भी कोई बैंक या विभाग पिन नंबर नहीं मंागता है, पिन नंबर सांझा न करें। मोबाइल में आलतू-फालतू एप न लोड करें। थोड़ा सा भी ठगी का संदेह हो तो तुरंत पुलिस को सूचना देंवे। जिससे तुरंत ट्रांजेशन रोका जा सकता है और बड़ी ठगी से बचा जा सकता है।
- सुंदर सिंह कनेश, एएसपी नीमच।
Published on:
07 Aug 2022 07:52 pm
बड़ी खबरें
View Allनीमच
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
