
सुरक्षा किट नहीं, कैसे करें घर के कपड़ों में आग से मुकाबला
नीमच. यूं तो जिला मुख्यालय पर आग को नियंत्रण करने के लिए तीन फायर फाईटर है। लेकिन सुरक्षा के संसाधनों के अभाव में सब खोखली नजर आ रही है। क्योंकि इनसे आग पर तो नियंत्रण किया जा सकता है। लेकिन अगर आगजनी के दौरान कहीं जान माल का नुकसान हो रहा हो, तो किसी की जान बचाना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुनकिन साबित होगा।
यह हम नहीं कह रहे हैं। यह हालात खुद बयां कर रहे हैं। पत्रिका ने जब शहर के कंट्रोल रूम पर खड़ी फायर बिग्रेड व उस पर तैनात कर्मचारियोंं पर नजर डाली तो हालात आश्चर्य जनक नजर आए। यूं तो फायर बिग्रेड में सभी आवश्यक संसाधन थे। लेकिन फायर बिग्रेड पर तैनात कर्मचारी सुरक्षा के संसाधनों के अभाव में आम वाहनों पर चलने वाले कर्मचारियों की तरह नजर आ रहे थे।
न सेफ्टी शूज, न यूनिफार्म, फायर कंट्रोल किट भी नहीं
फायर बिग्रेड पर दो कर्मचारी तैनात नजर आए, लेकिन उनके पास कोई यूनिफार्म भी नहीं थी, साथ ही सेफ्टी शूज भी नहीं पहने थे, आश्चर्य की बात तो यह है कि जो आग पर नियंत्रण करने के लिए मैदान में कूदता है वह खुद चप्पल पहने हुए था। ऐसे में यह कर्मचारी सिवाए छोटी मोटी आग को नियंत्रण कर सकते हंै। बड़ी आग के दौरान उन्हें कोई भी रिस्क लेना किसी चुनौती से कम नहीं रहेगा।
प्रत्येक फायर बिग्रेड पर एक सुरक्षा किट होना चाहिए, जिसमें ऑक्सीजन सिलेंडर, सिर से पांव तक पहनी जाने वाली वह यूनिफार्म जिसे पहनने के बाद आग में भी कूद जाए तो आग व्यक्ति का कुछ न बिगाड़ सके, स्पेशल हेलमेट, मॉस्क आदि होना चाहिए। लेकिन आश्चर्य की बात है कि जिला मुख्यालय पर चलने वाली तीनों फायर फाईटर में से एक में भी यह किट नहीं थी। जब कंट्रोल रूम पर खड़ी फायर फाइटर में पड़ताल की तो यहां ऑक्सीजन का सिलेंडर तो नजर आया, लेकिन उसमें ऑक्सीजन थी या नहीं राम जाने, वहीं किट के कहीं अते पते नहीं थे। गाड़ी में रखे हुए हेलमेट भी बहुत मामूली थे, जो निर्माण के दौरान मजदूर पहनते हैं वह नजर आ रहे थे। ऐसे में अगर कहीं आग के दौरान कोई व्यक्ति फस जाए तो फायर मेन उसे बचाने की हिम्मत भी नहीं कर पाएगा। ऐसा ही कुछ साल पहले जिला मुख्यालय पर हुई आगजनी की घटना में हो चुका है। एक महिला और बच्चे की मौत आग में फंसने के कारण हो गई थी, लेकिन कोई उन्हें बचा नहीं सका।
तीन साल से घर के कपड़ों में बुझा रहे आग
तीन फायर फाइटर में से एक पर 24 घंटे तीन तीन लोगों का स्टॉफ तैनात रहता है। जिसमें एक चालक और दो फायर मेन रहते हैं। यह फायर फाइटर कंट्रोल रूम पर खड़ी रहती है। ताकि आग की सूचना मिलने पर तुंरत मौके पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण किया जा सके। लेकिन आश्चर्य की बात है इनमें से किसी भी व्यक्ति के पास यूनिफार्म, सेफ्टी शूज, दस्ताने आदि सुरक्षा के साधन नहीं थे। चालक शफी मोहम्मद और फायर फायरमेन मोहनलाल मारू ने बताया कि पिछले तीन चार साल से किसी को भी यूनिफार्म सहित अन्य सुरक्षा के साधन नहीं मिले हैं। ऐसे में घर के कपड़ों में ही काम कर रहे हैं।
शार्ट सर्कीट से हर दिन लग रही जिले में आग
जिले में गर्मी के दौरान हर दिन कहीं न कहीं शार्ट सर्कीट के चलते आग की घटना हो रही है। यह तो अच्छा है कि आग की घटनाएं अभी तक खेतों तक ही सिमित है। लेकिन कहीं ये आग की घटना बड़े रूप में होती है तो निश्चित ही उस पर नियंत्रण करने के लिए टीम कमजोर नजर आएगी। क्योंकि उनके पास सुरक्षा के संसाधन का अभाव है। ऐसे में वे कैसे किसी की जान बचा पाएंगे, जब वे खुद सुरक्षित नहीं होंगे।
यह मेरी जानकारी में नहीं था। अगर ऐसा है तो हम निश्चित ही कुछ करेंगे। ताकि फायर बिग्रेड स्टॉफ को सुरक्षा के संसाधन मिलें।
-रियाजउद्दीन कुरैशी, सीएमओ
Published on:
13 Apr 2019 01:15 pm
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