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पांच किलोमीटर दूर रेलवे स्टेशन, कैसे मिलेगी मुफ्त आवाजाही की सौगात

-विद्यार्थियों को मिलने वाला आवागमन भत्ता भी स्थगित-रेलवे लाईन पर चंद स्टेशन होने के कारण नहीं ले सकेंगे विद्यार्थी योजना का लाभ

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नीमच. कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थियों को मिली १५० किलोमीटर तक नि:शुल्क यात्रा की सौगात जिले के विद्यार्थियों के लिए खास फायदेमंद नजर नहीं आ रही है। क्योंकि जहां एक ओर जिला मुख्यालय पर पहुंचने के लिए चंद गांवों में ही ट्रेन की सुविधा है। वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय पर स्थित शासकीय महाविद्यालय की दूरी स्टेशन से करीब पांच किलोमीटर दूर होने के कारण विद्यार्थियों को ट्रेन के किराए से होने वाली बचत की अपेक्षा स्टेशन से महाविद्यालय पहुंचने का ऑटो रिक्शा का किराया काफी महंगा पड़ेगा।
फैक्ट फाईल
महाविद्यालय का नाम विद्यार्थियों की संख्या
-स्वामी विवेकानंद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ३६५२
-सीताराम जाजू शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय २३५०
बतादें की जिला मुख्यालय पर दो प्रमुख शासकीय महाविद्यालय है। जहां पर करीब ६ हजार से अधिक छात्र छात्राएं अध्यनरत हैं। इन विद्यार्थियों में करीब ५० से ६० प्रतिशत विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। जिसमें से अधिकतर विद्यार्थी बसों के माध्यम से महाविद्यालय आवाजाही करते हैं। क्योंकि रेलवे की सुविधा चंद ग्रामीण क्षेत्रों में ही है। ऐसे में विद्यार्थियों को इस सौगात का लाभ कम ही मिल पाएगा।
दोनों साईड से एक-दो गांव रूकती है ट्रेन
बतादें की जिला मुख्यालय से होकर गुजरने वाली टे्रन मंदसौर की ओर से आती है वहीं चित्तोडग़ढ़ की ओर जाती है। जिसमें मंदसौर की ओर से आते समय जिले की सीमा में केवल हर्कियाखाल आता है। वहीं चित्तोडग़ढ़ की ओर बिसलवास कला और जावद रोड आता है जिसके बाद राजस्थान की सीमा लग जाती है। इस प्रकार करीब ३-४ गांव ही ऐसे हैं जहां से विद्यार्थी जिला मुख्यालय पढ़ाई करने के लिए आवाजाही कर सकते हैं। शेष विद्यार्थियों को बस से आवाजाही करना ही पड़ेगा। क्योंकि जिले के अन्य गांवों में रेलवे की सुविधा नहीं है।
पांच किलोमीटर का सफर पड़ेगा महंगा
वैसे तो ट्रेन से आवाजाही करना जिला मुख्यालय पर स्थित महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए मुनासिब नहीं हैं। क्योंकि अगर वे किसी प्रकार अपने अपने गांवों से ट्रेन के माध्यम से आते भी हैं तो उन्हें रेलवे स्टेशन से पीजी कॉलेज तक २० रुपए आने के व २० रुपए जाने के वहन करने पड़ेंगे। इस मान से उन्हें महाविद्यालय से रेलवे स्टेशन तक ही आवाजाही में ४० रुपए तक वहन करने पडेंगे तो निश्चित ही वे बस की यात्रा ही पसंद करेंगे। क्योंकि बस के माध्यम से आवाजाही करने पर उन्हें महाविद्यालय के काफी नजदीक ही बस में से उतारा जाता है। इस कारण उन्हें वहां से महाविद्यालय आवाजाही करने में दिक्कत नहीं होगी।
आवागमन योजना के ५ रुपए भी अधर में
जो विद्यार्थी ग्रामीणों क्षेत्र से पढऩे के लिए महाविद्यालय आते हैं। उन्हें शासन की योजना अनुसार ५ रुपए प्रतिदिन के मान से एक माह में अधिकतम २० दिनों का किराया दिया जाता है। जो करीब दस माह के लिए १ हजार रुपए तक दिया जाता है। हालांकि आवाजाही के लिए आवागमन योजना के तहत मिलने वाले पांच रुपए प्रतिदिन के मान से बहुत कम हैं। क्योंकि आसपास के गांवों से नीमच पहुंचने के लिए कम से कम १० से १५ रुपए एक साईड के लगते हैं। लेकिन इस योजना के तहत भी विद्यार्थियों को गत वर्ष तक लाभ मिला, इस वर्ष २०१७-१८ के लिए योजना को फिलहाल स्थगित किया गया है। कहीं ऐसा न हो जाए कि रेलवे से मुफ्त यात्रा के चक्कर में यह पांच रुपए भी विद्यार्थी के हाथ से छूट जाएं।
वर्जन.
महाविद्यालय में पढऩे वाली करीब ७० प्रतिशत छात्राएं ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। लेकिन अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय के लिए रेलवे की सुविधा नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए फ्री आवाजाही की सुविधा रेलवे के साथ बसों में भी की जानी चाहिए। ताकि क्षेत्र के विद्यार्थियों को वास्तविक रूप से योजना का लाभ मिले।
-एनके डबकरा, प्राचार्य, सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नीमच
विद्यार्थियों को मिलने वाली आवागमन योजना फिलहाल स्थगित की गई है। इसमें संशोधन कर विद्यार्थियों को वास्तविक खर्च मिलना चाहिए। रेलवे के माध्यम से मुफ्त यात्रा के संबंध में अभी तक कोई आदेश नहीं आए हैं। जैसे ही आदेश आएंगे उनके अनरूप कार्य किया जाएगा।
-वीके जैन, प्राचार्य, स्वामी विवेकानंद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय