नीमच/सिंगोली/रतलाम। स्थानीय वर्धमान स्थानक भवन मे विराजित महाअभिग्रहधारी राजेश मुनि मसा एवं सेवाभावी राजेंद्र मुनि मसा के सानिध्य में निरंतर धर्म आराधना की गंगा बह रही है।
प्रतिदिन श्रावक श्राविकाओ द्वारा प्रात:काल प्रार्थना से लेकर सायंकाल प्रतिक्रमण और धर्म चर्चा में सभी लोग उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। प्रत्येक शनिवार को संवर दिवस के रूप मे मनाया जा रहा है। इसके चलते श्रावक श्राविकाएं रातभर स्थानक में रहकर धर्म आराधना करते हैं। प्रवचन में बोलते हुए राजेश मुनि मसा ने बताया कि किसी भी कार्य की सफलता उसके प्रति उत्साह में छिपी होती है। हम धर्म आराधना करते तो हैं पर यदि इसके प्रति उत्साह के भाव नहीं है तो हमारा मन धर्म आराधना में नहीं लगेगा। यदि उत्साह के साथ हम यह कार्य करें तो निश्चित ही हमें इसका लाभ मिलेगा। हमारा मन कौतुहल का आदि है। यह एक जगह स्थिर और शांत नहीं रह सकता है। यदि हम मन को 4 मिनट और 22 सेकंड एक जगह स्थिर और शांत रखने में कामयाब हो जाते हंै तो हमें भी केवल ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। भगवान महावीर को भी अपने मन को इतनी देर स्थिर और शांत रखने में साढ़े बारह साल लगे तब जाकर उन्हें केवल ज्ञान हुआ था। गुरुदेव ने धर्म का ओर जिनवाणी का महत्व बताते हुए कहा कि
धर्म मंगल उत्कृष्ट है अहिंसाए संयमए तपए से
देव भी नमते उससे जो सदा धर्म मे रत रहते हैं ।
इसलिए हमें हमारे जीवन का उद्धार करने के लिए सदा धर्म के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि ज्ञान पाना सरल है पर पाए हुए ज्ञान को संभाल कर रखना बड़ा कठीन है। हम धर्म और ज्ञान जो भी करे या सीखे उसमें उत्साह होना चाहिए। उत्साह से किया हुआ कार्य ही सफल और स्थाई होता है। प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे।