नीमच। केंद्र सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले आज बुधवार देर रात वर्ष 2023-24 की अफीम नीति जारी की है। किसानों को नई अफीम नीति से काफी आस थी, लेकिन इस अफीम नीति में किसानों के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है। किसानों की अब तक की मांग को भी पूरा नहीं किया गया है। डोडाूचरा का मूल्य, सीपीएस को समाप्त करने व परंपरागत खेती में नए एमएस पट्टे जारी करने को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है। इस वर्ष की यह अफीम नीति केंद्र व प्रदेश में काबिज बीजेपी सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकती है। वर्ष 2023 24 की नई अफीम नीति में नियमों में उदारीकरण वाले बदलाव कर सीपीएस पद्धति के तहत 25 हजार से अधिक लायसेंस बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
उल्लेखनीय है कि बुधवार देर रात वित्त मंत्रालय से जारी अफीम नीति 2023-24 में 3 से 4.2 किलोग्राम तक अफीम देने वाले किसानों को सीपीएस के पट्टे जारी किए गए हैं। वहीं 4.2 से ज्यादा अफीम देने वालों को परपंरागत लुनाई-चिराई खेती में पट्टे दिए गए हैं। वहीं आगामी वर्ष के लिए 5.9 किलोग्राम प्रति औसत के मान से एमएस पट्टे जारी करने की बात कही। इस पूरी अफीम नीति में परंपरागत खेती के नए पट्टे जारी करने का कहीं भी जिक्र नहीं किया गया। इस बार 20 से 25 हजार नए एमएस पट्टे सीपीएस पद्धति में जारी होने की संभावना है जो आगामी 5 साल तक के लिए किसानों को दिए जा सकते हैं।
नई नीति के अनुसार, सीपीएस पद्धति के तहत वर्ष 2023 – 24 के लिए पढेकी पात्रता सम्बन्धी नियमों का विवरण इस प्रकार है-
(1) पांच वर्ष के लिए जारी किए। गए लायसेंस के आधार पर वे किसान जिन्होंने फसल वर्ष 2022-23 के दौरान डोडों पर बिना चीरा लगाते हुए खेती की और अपनी उपज को सरकारी तौल केंद्र पर जमा भी करा दी थी, उनको नीतिगत अन्य प्रावधानों के अनुरूप सही पाए जाने पर पुन: लायसेंस दिया जाएगा।
(2) ऐसे सभी किसानों को, वर्ष 2022 23 में जिनके द्वारा सरकार को दी गई अफीम में मार्फिन की औसत मात्रा 3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या इससे अधिक किंतु 4.2 किलोग्राम से कम पाई गई है, पुन: सीपीएस के तहत पट्ट दिया जाएगा।
(3) ऐसे सभी किसान जिन्होंने फसल वर्ष 2021-22 और 2022-23 में अपनी संपूर्ण खड पोस्त फसल को इस बारे में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार तथा केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की निगरानी में जुताई कर दी थी, उनको पुन: पट्टा दिया जाएगा
(4) ऐसे किसान जो कि फसल वर्ष 2022-23 में लायसेंस पाने के पात्र थे लेकिन किन्हीं कारणों से वह लायसेंस प्राप्त नहीं कर पाए या जिनका लायसेंस जारी नहीं किया जा सका था। जिन्होंने लायसेंस जारी सीपीएस पद्धति के अंतर्गत मी सभी पात्र किसानों को नव घोषित होने के बाद भी किसी कारण से अफीम की खेती वास्तव में नहीं की थी। उनको पुन: पट्टा मिलेगा।
(5) ऐसे सभी किसान जिनके लायसेस को फसल वर्ष 1999- 2000 से 2022-23 के दौरान इस आधार पर रह कर दिया गया था कि उन्होंने घटिया किस्म की अफीम जमा कराई थी, लेकिन नीमच या गाजीपुर के सरकारी अफीम एवं अल्कालॉयड कारखाने में किए गए परीक्षण से पता चला कि उनमें मार्फिन की आवश्यकता है।
लायसेंस जारी रखना है तो 700 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की औसत से देना होगा डोडा
नई ओम नीति में इस बार बहुत महत्वपूर्ण प्रावधान करते हुए सीपीएस पद्धति के अंतर्गत लायसेंसधारी किसानों के लिए भी अपना लायसेंस जारी रखने के लिए न्यूनतम औसत डोडा उत्पादन की शर्त तय की गई है। नीति के अनुसार, जो किसान वर्ष 2023-24 में खेती कर प्रति हेक्टेयर 700 किलोग्राम की औसत से बिना चीरा लगा डोडा सरकार को देंगे उनको ही आगामी अफीम फसल वर्ष 2024-25 के लिए लायसेंस की पात्रता होगी। यह नियम डोडों की तस्करी की आशंकाओं के निवारण के हिसाब से बहुत उपयोगी कहा जा सकता है। नीति में सरकार ने पिछले साल की तरह इस बार भी समान रूप से 10-10 आरी का लायसेंस देने का निश्चय किया है। इस श्रेणी के अंतर्गत पात्र घोषित किसानों को कुछ निर्धारित शर्तों के अधीन फसल वर्ष 2027 28 तक की अवधि के लिए लायसेंस जारी किया जाएगा।
नई अफीम नीति ने बढ़ाई बीजेपी की मुश्किलें
राजनीतिक जानकारों की मानें तो बुधवार देर रात जारी हुई अफीम नीति 2023-24 ने विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की मुश्किल को बढ़ा दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले जारी हुई अफीम नीति में किसानों को कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। किसानों व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की प्रमुख मांगों को वित्त मंत्रालय ने पूरा नहीं किया है। जबकि किसानों की मांग थी कि डोडाचूरा का मूल्य निर्धारित किया जाए। टर्की से पोस्ते के आयात पर रोक लगाई जाए। साथ ही एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/29 में संशोधन किया जाए। कटे हुए पट्टों को बहाल कर परंपरागत खेती का अधिकार दिया जाए। लेकिन वित्त मंत्रालय की नई अफीम नीति में इन मांगों पर कोई विचार नहीं किया गया है।
इनका यह कहना है
चुनावी वर्ष के चलते किसानों को नई अफीम नीति से काफी आशा थी, लेकिन सरकार ने किसानों को ***** बनाया है और पुन: गत वर्ष जैसी नीति घोषित कर दी है। जबकि किसान को चनावी वर्ष देखते हुए आशा थी कि नए पट्टे जारी होंगे, अफीम की औसत बढ़ेगी, 15-20 आरी के पट्टे मिलेंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, किसान को ठगा जा रहा है।
– योगेंद्र जोशी, महासचिव, अफीम किसान संगठन मध्यप्रदेश।