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11 वीं शताब्दी में चोल वंश के राजा ने नीमच के नौ तोरण द्वार मंदिर का किया था निर्माण

- पुरातन और प्राचीन महत्व होने के कारण द्वार और मंदिर को देखने दूर-दूर से आते हैं पर्यटक

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11 वीं शताब्दी में चोल वंश के राजा ने नीमच के नौ तोरण द्वार मंदिर का किया था निर्माण

11 वीं शताब्दी में चोल वंश के राजा ने नीमच के नौ तोरण द्वार मंदिर का किया था निर्माण

नीमच। खोर का नौ तोरण द्वार और शिव मंदिर कभी प्राचीन राजसी वैभव की गाथा कहता था, लेकिन वर्तमान में यह खंडहर की तरह नजर आता है। इसके बावजूद यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है । चित्तौडग़ढ़ तक पहुंचने वाले पर्यटक कई बार नौ तोरण द्वार और मंदिर तक आते हैं।

जिला मुख्यालय से करीब 21 किमी दूर ग्राम खोर है। नयागांव के नजदीक खोर में प्राचीन नौ तोरण द्वार और मंदिर है। प्राचीन शिलालेख और इतिहासकारों के अनुसार नौ तोरण मंदिर और द्वार का निर्माण 11 वीं शताब्दी में हुआ। तत्कालीन चोल वंश के राजा ने इसका निर्माण कराया था, लेकिन अनदेखी और प्राचीनता के कारण नौ तोरण मंदिर और द्वार खस्ता स्थिति में हैं। बावजूद आकर्षण का केंद्र हैं। पुरातन और प्राचीन महत्व होने के कारण द्वार और मंदिर को देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी और पर्यटक पहुंचते हैं। वर्तमान में नौ तोरण द्वार की स्थिति दयनीय मानी जा सकती है। 9 में से 4 द्वार क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। खंडित स्थिति में हैं। महज 5 द्वार पूर्ण हैं।

यह भी स्थिति

- मंदिर में विशाल शिवलिंग है। नंदी की प्रतिमा भी है। दोनों ही खंडित स्थिति में हैं।

- नंदी पर प्राचीन देवी-देवताओं की कई आकृतियां उकेरी हुई हैं।

- खोर और अन्य क्षेत्रों के लोग आज भी प्राचीन मान्यता के अनुसार मंदिर पर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

नौ तोरण नाम के पीछे का रहस्य
हिंदू धर्म में तोरण का आशय विवाह के दौरान दूल्हे द्वारा तोरण मारने की रस्म से है। नौ तोरण द्वार को भी उसी रस्म से जुड़ा बताया जाता है। चोल वंश के राजा की नौ पुत्रियां थीं, जिनकी शादी के उपलक्ष्य में उन्होंने नौे तोरण द्वार और मंदिर का निर्माण कराया था। इसी बात का उल्लेख यहां मिलता है।

देखरेख के लिए 5 कर्मचारी नियुक्त
नौ तोरण मंदिर और द्वारा केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन है। यहां विभाग के 5 अस्थायी कर्मचारी तैनात है। 3 रात के समय सुरक्षा का दायित्व संभालते हैं, जबकि 2 दिन में मंदिर व द्वार की पहरेदारी करते हैं। बावजूद स्थिति को बेहतर नहीं कहा जा सकता।

इनका यह कहना है
जावद तहसील के खोर गांव में स्थित नौ तोरण मंदिर काफी प्राचीन और ११ वी शताब्दी का है। नौ तोरण मंदिर और द्वारा केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन है। इसमे नौ द्वार, चडिय़ा, चंद्रमा, शंख, अर्धमंडप, महामंडप, पुजारियों की बैठने की जगह और उसके बाद गृभ गृह का निर्माण है। यह हार्ड स्टोन से बना है, जो कि समीप करीब ४०-५० किलोमीटर दूर सुवाखेड़ा की खदान से स्टोन निकलता है। यह काफी प्राचीन है और अब खंडर में तब्दील होने लगा है।
- हिम्मत सिंह, टूरिस्ट गाइड नीमच।