
मालवा के संत की संगीतमय कथा और भजनों में रमे श्रद्धालु
नीमच. मालवा के संत पंडित कमल किशोर नागर के मुखारबिंद से आयोजित संगीतयम श्रीमद्भागवत कथा का समापन शनिवार को हुआ। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु जिले सहित दूर दराज से पहुंचे। कथा में श्रद्धालु पंडित नागर के भजनों की स्वरलहरियों पर झूमते गाते नजर आए। वहीं महाआरती के दौरान पूरा पांडाल कृष्ण कन्हैयालाल के जयकारों से गूंज उठा। अंतिम दिन श्रद्धालुओं का अपार सैलाब उमड़ा तो पांडाल भी छोटे नजर आने लगे थे।
कथा के अंतिम दिन पंडित नागर ने कहा कि सम्मान व्यक्ति का नहीं उसके गुणों का होना चाहिए । प्रणाम व्यक्ति का नहीं उसके संस्कारों का होता है। आदमी नाम से नहीं पुण्य कर्मो से पहचाना जाता है। पाप कर्म करेंगे तो नर्क और पुण्य कर्म करेंगे तो स्वर्ग मिलेगा। मनुष्य को सदैव हंसमुख, खुश, सरल रहना चाहिए। तभी उसके जीवन का कल्याण होगा ।
गौसेवक एवं डीकेन ग्रामवासियों से सहयोग से गगरानी तालाब के पास बने भक्ति पांडाल में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत का विश्राम हुआ। जिसके चलते पूरा पांडाल खचाखच भरा था। उन्होंने कहा कि लोग विवाह संबंध करते समय धन सुख वैभव देखते हैं। जबकि विवाह संबंध संस्कारवान गुण देखकर करना चाहिए । चाहे वह गरीब परिवार का ही क्यों नहीं हो । हरि भक्ति का मार्ग सरल नहीं कठिन होता है। सबको साथ लेकर चलने वाले दान पुण्य का पुरूषार्थ करने वाले गरीब होते है। कितनी भी गरीबी हो ईमानदारी के कारण कभी भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता है । सत्संग में तकलीफ है लेकिन स्वर्ग में फिर सुख ही सुख है । घर में देवी देवताओं के फोटो लगाएं , घर में कितना अभिनेता राजनेता के फोटो नहीं लगाना चाहिए । धर्म की निंदा कुछ लोग करते है यह अनुचित है जिनका इस धरती पर चाल चलन ठीक नहीं है उनके अनुयाई नहीं बने तभी जीवन का कल्याण होगा । भक्त प्रहलाद ने अपने गुरू को सच कह दिया था कि गुरू आप स्वार्थ के लिए असत्य ज्ञान दे रहे हो यह गलत है । कथा तुलसी पत्र से ही होती है कोई दक्षिणा कोई भेंट नहीं लेते है। मोरवन गौशाला द्वारा एक स्थाई कोष की स्थापना करें और कथा बरेखन गौशाला में ही आयोजित होगी । कपड़ा गलत होगा तो दूसरा ले लेंगे । लेकिन किसी नकली गुरू को बना लिया तो जीवन बेकार हो जाएगा । गुरू बनाना है तो महादेव को ही बना लो । भजन सत्संग करेंगे तो घर वैसा ही मिलेगा । कुछ लोग सदैव उदास रहते है यह अच्छा नहीं है सुदामा गरीब जरूर था लेकिन संतोषी था । रामायण का एक शब्द भी इंसान को भवसागर से पार करा देता है। राम रसोड़ा के बाद गाऊ रसोड़ा बनाएं ।
Published on:
28 Apr 2019 01:23 pm
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