
तहसील भवन के लिए आवंटित जमीन पर जेसीबी चलाते हुए।
नीमच/जावद. रतनगढ़ तहसील भवन के लिए आवंटित भूमि पर नायब तहसीलदार, पटवारी ने भू-माफियों से सांठगांठ कर अवैध कब्जे करा दिए। बड़ा घोटाला रतनगढ़ के समीप ग्राम गुजालिया में सर्वे क्रमांक 285 की भूमि को लेकर प्रकाश में आया है। रतनगढ़ से लगी यह भूमि कीमती होकर भू-माफिया स्थानीय राजस्व कर्मियों से सांठगांठ कर बड़ी भागीदारी कर भूमि हड़पने में सफल हुआ है।
ग्रामीणों ने कलेक्टोरेट पहुंच कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
ग्राम गुंजालिया का राजस्व नक्शा न होना, तहसील कर्मियों व भू-माफियों के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। इस भूमि में शासन ने वर्ष 1980 में तीन पट्टे दिए, जिनमें दो पट्टेदार नारू भील व औकार भील का इस भूमि पर कभी कोई कब्जा नहीं रहा। वर्ष 2001 में नायब तहसीलदार ने सभी पट्टाधारियों की सहमति से बंटाकन स्वीकृत किया, किन्तु बंटाकन का नक्शा न होने से अमल दरामद नहीं हो सका। एक पट्टेदार ललितादेवी खत्री का सर्वे क्रमांक 285 के एक भाग पर कब्जा बना रहा। इस बीच रतनगढ़ में तहसील भवन के लिए भूमि प्रस्तावित करने की कार्यवाही के दौरान नायब तहसीलदार रतनगढ़ ने सर्वे क्रमांक 285 में से 3.000 हेक्टर भूमि प्रस्तावित की। इस प्रकरण क्रमांक 338बी121/19-20 में नायब तहसीलदार रतनगढ़ ने विधिवत पटवारी टीम बनाकर राजस्व निरीक्षक से प्रतिवेदन मांगा व भूमि का नक्षा प्रस्तावित किया। सभी विभागों की अनुशंसा की गई व प्रस्तावित नक्शे के अनुसार कलेक्टर महोदय नीमच ने सर्वे क्रमांक 285 में से तीन हेक्टर भूमि तहसील भवन के लिए आवंटित करने का आदेश 13 जुलाई 20 को दिया इसका ज्ञान पटवारी/नायब तहसीलदार को आरंभ से रहा है। भू-माफिया की निगाह इस कीमती भूमि पर आरंभ से रही। भू-माफिया ने नायब तहसीलदार/पटवारी से सांठगांठ की व आदिवासी पट्टेदार सत्यनारायण जिसका भूमि के किसी भाग पर कब्जा नहीं था। शासकीय पट्टे की भूमि के तथ्य को छुपाकर आदिवासी से गैर आदिवासी को विक्रय की अनुमति दिलाकर श्तहसील भवन के लिए आवंटित भूमि पर कब्जा करा दिया। इसी तरह पिछले दिनों अनुविभागीय अधिकारी जावद ने खड़े रहकर एक अन्य पट्टेदार औकार भील को तहसील भवन की भूमि पर कब्जा दिलाया राजस्व कर्मियों ने खुद कलेक्टर नीमच के आवंटन आदेश की धज्जिया उड़ाकर भू-माफियों के हवाले कर दी। आदिवासी पट्टेदारों की आड़ में भू-माफिया के ट्रैक्टर व जेसीबी मशीन चलाकर भूमि पर कब्जा कर लिया गया। करोड़ों रुपए की कीमती भूमि हड़पकर ‘तहसील भवन’ के लिए आवंटित आदेश को हवा में उड़ा दिया है। रतनगढ़ में इस भूमि घोटाले की चहुुंओर चर्चा गर्म है। सारा राजस्व महकमा कटघरे में है कि शासन द्वारा आंवटित भूमि सुरक्षित रखने की बजाय भूमि बेचकर भू-माफियों को सौंप दी है। नागरिकों की और से कलेक्टर नीमच को मय दस्तावेजों के साथ ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर नीमच से मांग की है कि वे सर्वे क्रमांक 285 रकबा 300 हेक्टेयर जो तहसील भवन के लिए आरक्षित की गई है। इस संबंध में रतनगढ़ नायक तहसीलदार मोनिका जैन से चर्चा करने पर बताया कि वह छुट्टी पर हैं। इस मामले में सिंगोली तहसीलदार सोनी आपको जानकारी देंगे। सिंगोली तहसीलदार सोनी से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाना ही मुनासिब नहीं समझा।
Published on:
02 Aug 2023 12:04 pm
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