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Ajab-Gajab MP: जीवित किसान को सरकारी रिकाॅर्ड में दिखा दिया मृत, अब मजबूरन काट रहा सरकारी दफ्तरों के चक्कर

- किसान सम्मान निधि नहीं मिलने पर जांच में खुला मामला

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नीमच

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Deepesh Tiwari

May 26, 2023

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नीमच@वीरेंद्र सिंह राठौड़
एक किसान लंबेे समय से हाथ में कागजों का पुलिंदा लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, वह भी सिर्फ यह बताने के लिए वह जिंदा है। असल में सरकारी रिकॉर्ड में किसान को मृत बता दिया गया है। किसान सम्मान निधि नहीं मिलने पर पड़ताल हुई तो पता चला कि किसान तो सरकारी कागजों में मृत घोषित किया है। मामला पिपल्या नथावात गांव का है। आरोप है कि पटवारी ने किसान को रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया है, जबकि वह जीवित है। मई 2021 से उसे मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि प्राप्त नहीं हो रही है।

किसान की पीड़ा
पीडि़त उदयसिंह पिता देवीसिंह राजपूत ने बताया कि उसके खाते की कृषि भूमि पिपलिया नाथावत में है। पूर्व में उसे शासन की ओर से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि मिल रही थी, जो पिछले वर्ष से बंद हो गई। कार्ड में उसे मृतक घोषित कर दोनों योजनाओं की राशि बंद कर दी गई है। उसने पटवारी को कई बार कागज दिए, लेकिन उक्त राशि अभी तक चालू नहीं हुई है।

मामला काफी गंभीर है। लापरवाही के चलते मौजूदा पटवारी ने मृत घोषित किया है। मामले की जांच कर रहे हैं। वहीं किसान का कार्ड एक्टिव कराने के लिए भोपाल सबमिट कर दिया है।
- विजय सैनानी, तहसीलदार नीमच

ज्ञात हो कि ऐसा ही एक मामला जबलपुर से भी सामने आ चुका है, जहां एक किसान को सरकारी तंत्र ने मृत घोषित कर दिया ऐसे में किसान अपने आप को जीवित बताने के लिए दर-दर भटक रहा था।

यह मामला जबलपुर के कुंडम तहसील के बघराजी गांव का था जहां 2019 में किसान को सरकार से किसान सम्मान निधि स्वीकृत हुई और दो साल तक मिली भी पर 2021 में अचानक किसान सम्मान निधि यह बताते हुए बंद कर दी कि उनकी मौत हो गई है, इस वजह से उन्हें राशि नहीं दी जा रही है। जिसके बाद किसान को खुद को जीवित बताने के लिए सरकारी कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पडे।

दरअसल कुंडम तहसील के ग्राम बघराजी में किसान अनिल कुमार शुक्ला की करीब 1 एकड़ 60 डिसमिल जमीन पर उसे शासन की तरफ से एक साल मे तीन बार दो-दो हजार रु मिला करते थे। अनिल कुमार के खाते में साल 2019 और 2020 में किसान सम्मान निधि तो आई, परंतु अचानक साल 2021 में आना बंद हो गई। अनिल कुमार ने जब पटवारी से पूछा तो उनका कहना था कि पता लगाया जा रहा है, पर जब साल बीत गया और कुछ नहीं हुआ तो अनिल कुमार कुंडम तहसील पहुंचे जहां उन्होंने तहसीलदार और एसडीएम से मुलाकात को पर वहां पर भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। किसान ने जब आन लाइन अपनी बेनीफिसरी स्टेटस रिपोर्ट देखी तो वह चौंक गए क्योंकि उनकी रिपोर्ट में उन्हे मृत दिखा दिया गया था।